जबलपुर: जिला अस्पताल विक्टोरिया में एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की पोल खुली और मरीजों ने अपने आप को ठगा सा महसूस किया। ताजा मामला और तस्वीरें उन महिला मरीजों की सामने आईं जिन्हें ठंड के दौरान महिला नसबंदी ऑपरेशन के बाद अस्पताल की दरी पर बैठा दिया गया। यहां न तो पर्याप्त बैड हैं, न कंबल या हीटर जैसी कोई व्यवस्था। जानकारों का स्पष्ट कहना है कि विक्टोरिया अस्पताल प्रबंधन सीधे तौर पर मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
जानकारी के अनुसार एलटीटी ऑपरेशन के बाद महिलाओं पर दवाइयों का असर रहता है, जिससे उनका संतुलन बिगड़ जाता है और चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद अस्पताल में ऐसी महिलाओं को स्ट्रैचर और व्हील चेयर उपलब्ध नहीं हो पा रहीं हैं। ताजी तस्वीरों में तो ऑपरेशन के बाद महिलाएं खुद पैदल चलकर बाहर जाती हुईं दिखाई दे रहीं हैं।
इस तरह की लापरवाही से स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि एक सर्जन द्वारा प्रतिदिन अधिकतम 30 महिला नसबंदी ऑपरेशन किए जाएं, ताकि मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके। लेकिन जिला अस्पताल विक्टोरिया में इन नियमों को ताक पर रखकर 30 से अधिक ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
इनका कहना है-
महिला नसबंदी ऑपरेशन जिस दिन हुआ था उस दिन महिलाओं की संख्या अधिक हो गई थी और दो डॉक्टर्स द्वारा सभी महिलाओं के विधिवत ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए। अस्पताल में महिला मरीजों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
–डॉ. संजय मिश्रा, सीएमएचओ, जबलपुर।
