नई दिल्ली/बैंकॉक। 27 दिसंबर, 2025। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे खूनी सीमा संघर्ष पर शनिवार को पूर्ण विराम लग गया है। थाईलैंड के चांथाबुरी प्रांत में स्थित एक बॉर्डर चेकपॉइंट पर दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों—थाईलैंड के नत्थापोन नाकपानिच और कंबोडिया के उप-प्रधानमंत्री टी सिया—ने औपचारिक रूप से युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस उच्च-स्तरीय बैठक में आसियान (ASEAN) के पर्यवेक्षक भी शामिल रहे, जो इस घटनाक्रम को दक्षिण-पूर्व एशिया की स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहे हैं। समझौते के बाद दोनों सेनाओं को विवादित क्षेत्रों से पीछे हटने और संयम बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
विवाद की जड़ें 20वीं सदी के औपनिवेशिक काल के नक्शों से जुड़ी हैं, खासकर प्रेह विहार मंदिर के आसपास की भूमि पर संप्रभुता को लेकर। दिसंबर की शुरुआत में हालात तब बेकाबू हो गए थे जब थाईलैंड ने फाइटर जेट्स और तोपखाने का उपयोग किया, जिसके जवाब में कंबोडिया ने रॉकेट दागे। डांगरेक पर्वत श्रृंखला के रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाकों में सैनिकों की आवाजाही और भारी गोलाबारी ने क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल दिया था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कूटनीतिक हस्तक्षेप और निरंतर वार्ता के बाद दोनों देश अंततः हथियार डालने और मेज पर बैठने के लिए राजी हुए।
सीजफायर समझौते के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि दशकों पुराने इस सीमा विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा। विवादित क्षेत्र में स्थित प्राचीन खमेर मंदिरों की सुरक्षा और स्थानीय नागरिकों की वापसी को प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से न केवल द्विपक्षीय व्यापार फिर से शुरू होगा, बल्कि सीमांकन के पेचीदा मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत हल करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। दोनों देशों ने भविष्य में किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई से बचने और संयुक्त सीमा समिति के माध्यम से नियमित संवाद बनाए रखने का संकल्प लिया है।

