
नई दिल्ली। एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के बीच सुल्तानपुर/घिटोरनी गांव स्थित 42.46 एकड़ भूमि से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद के समाधान को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता संपन्न हुआ है। यह समझौता उपराज्यपाल, दिल्ली की अध्यक्षता में हुई बैठक के संकल्प के माध्यम से तय किया गया।
समझौते के तहत कुल भूमि को एनबीसीसी और जीएनसीटीडी के बीच समान रूप से विभाजित किया जाएगा, जिससे एनबीसीसी के हिस्से में 21.23 एकड़ भूमि आएगी। एनबीसीसी इस भूमि के विकास हेतु जीएनसीटीडी को 135 करोड़ भूमि प्रीमियम और 15 करोड़ ब्याज सहित कुल 150 करोड़ का एकमुश्त भुगतान करेगा। इसके अलावा वर्ष 2006 से 2.5 प्रतिशत वार्षिक दर से भूमि किराए के बकाया सहित कुल भुगतान राशि लगभग 220 करोड़ होगी।
पूर्ण भुगतान के पश्चात जीएनसीटीडी द्वारा एनबीसीसी के पक्ष में स्थायी पट्टा विलेख निष्पादित किया जाएगा। यह विकास मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2021 के अनुरूप होगा, जिसके अंतर्गत मिश्रित उपयोग परियोजना, उप-पट्टे और ज़ोनिंग के अनुसार विकास की अनुमति मिलेगी। समझौते को दिल्ली उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद एनबीसीसी अपनी लंबित याचिका वापस लेगा।
एनबीसीसी द्वारा विकसित की जाने वाली इस परियोजना से लगभग 4.45 लाख वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्रफल तैयार होने की संभावना है, जिससे करीब 8,500 करोड़ के अनुमानित राजस्व की उम्मीद जताई जा रही है। एनबीसीसी प्रबंधन ने इसे संगठन के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता न केवल वर्षों पुराने विवाद का अंत है, बल्कि दिल्ली में सतत शहरी विकास और आधुनिक अवसंरचना को भी नई दिशा देगा।
