छिंदवाड़ा: शहर में लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा बिछाई गई सीवरेज पाइपलाइन के कार्यों की अब विस्तृत जांच कराई जाएगी। नगर निगम सभाकक्ष में महापौर विक्रम अहके की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि एक माह के भीतर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।बैठक में एमपीयूडीसी के परियोजना प्रबंधक अभय जैन, लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन के प्रतिनिधि सहित निगम के अधिकारी एवं पार्षद मौजूद रहे। इस दौरान सीवरेज पाइपलाइन बिछाने के दौरान सामने आई समस्याओं, लापरवाही और जनता की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की गई।
महापौर ने निर्देश दिए कि सभी वार्डों में संबंधित इंजीनियर, वार्ड दरोगा और पार्षद संयुक्त रूप से सीवरेज कार्यों की जांच करेंगे। चिन्हित कमियों और सुधार स्थलों की रिपोर्ट एक माह में प्रस्तुत की जाएगी, जिसके आधार पर लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन द्वारा शीघ्र सुधार कार्य कराए जाएंगे।महापौर ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि नगर के सभी 48 वार्डों के पार्षदों की सहमति के बाद ही सीवरेज परियोजना का पूर्णता प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। यदि किसी एक भी पार्षद ने असंतोष जताया, तो प्रमाणपत्र जारी नहीं होगा।बैठक में निगम अध्यक्ष सोनू मागो, आयुक्त सी.पी. राय, जलकार्य एवं सीवरेज सभापति अरुणा मनोज कुशवाहा सहित अन्य सभापति, पार्षद और जलप्रदाय से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे।
इन कार्यों को अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश
महापौर ने अधिकारियों एवं सीवरेज कंपनी को निर्देश दिए कि कहीं भी पेयजल पाइपलाइन के ऊपर से सीवरेज लाइन न हो, यदि ऐसा पाया जाए तो तत्काल सुधार किया जाए। सभी मैनहोल सड़क के निर्धारित स्तर पर लाए जाएं, सड़कों का समुचित रेस्टोरेशन सुनिश्चित किया जाए, चैंबरों के कारण बने गड्ढों की मरम्मत की जाए तथा जनता और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब प्राथमिकता केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि गुणवत्ता, जनसंतोष और जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान की होगी।
परियोजना की समयरेखा और प्रगति
नगर निगम द्वारा सीवरेज परियोजना की डीपीआर वर्ष 2015 में तैयार की गई थी, जिसे 17 अगस्त 2016 को स्वीकृति मिली। कार्य आदेश 24 जून 2017 और 21 जुलाई 2017 को जारी हुए। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की भूमि में परिवर्तन के कारण डिजाइन और ड्राइंग के अनुमोदन में लगभग 9 माह का समय लगा। परियोजना का कार्य 5 मई 2018 को प्रारंभ हुआ, जबकि पूर्णता तिथि 20 जुलाई 2020 निर्धारित थी।
परियोजना का ट्रायल रन 22 नवंबर 2024 से 1 जून 2025 तक चला। इसके बाद 2 जून 2025 को भौतिक पूर्णता एवं कमीशनिंग तथा 23 जून 2025 को ऑपरेशनल एक्सेप्टेंस प्रदान किया गया। प्रारंभिक डिजाइन-बिल्ड लागत 176.55 करोड़ रुपये थी, जो संशोधन के बाद बढ़कर 195.10 करोड़ रुपये हो गई।
