नई दिल्ली। 25 दिसंबर, 2025। बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद फैली भीषण अराजकता और उग्र भारत विरोधी प्रदर्शनों ने वहां शिक्षा प्राप्त कर रहे लगभग 8,000 भारतीय छात्रों को संकट में डाल दिया है। ढाका और चिटागांग जैसे प्रमुख केंद्रों में पढ़ाई कर रहे ये छात्र वर्तमान में अपने हॉस्टलों में कैद रहने को विवश हैं। हालिया राजनीतिक हिंसा के बाद हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई छात्रों को अपनी सुरक्षा के लिए अपनी भारतीय पहचान तक छिपानी पड़ रही है। कश्मीरी छात्रों की बड़ी तादाद वाले इन शिक्षण संस्थानों में वर्तमान में परीक्षाएं चल रही हैं, जिसके कारण छात्र जान का जोखिम होने के बावजूद स्वदेश लौटने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।
भारत में निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक होने के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बांग्लादेश एक किफायती विकल्प बना हुआ था। यहाँ मात्र 27 से 45 लाख रुपये में एमबीबीएस का पूरा कोर्स और भारत जैसी सांस्कृतिक समानता छात्रों को आकर्षित करती थी। नीट क्वालीफाई करने के बाद स्थानीय एजेंटों के माध्यम से आसानी से मिलने वाला दाखिला हर साल हजारों युवाओं को यहाँ खींच लाता था। लेकिन वर्तमान अस्थिरता ने अब अभिभावकों और छात्रों को इस फैसले पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है। दिल्ली सहित कई राज्यों के पेरेंट्स अब सुरक्षित वापसी और फीस रिफंड की मांग कर रहे हैं।
ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके भविष्य की अनिश्चितता है। यदि वे हिंसा के डर से परीक्षा छोड़ते हैं तो उनका कीमती साल बर्बाद हो जाएगा, और यदि वे रुकते हैं तो उग्र भीड़ का निशाना बन सकते हैं। छात्रों और उनके परिवारों ने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है। भारतीय दूतावास लगातार छात्रों के संपर्क में है, लेकिन जमीनी स्तर पर बढ़ते भारत विरोधी स्वर ने भविष्य के इन डॉक्टरों को एक ऐसे दोराहे पर खड़ा कर दिया है जहाँ उनकी डिग्री और जान दोनों दांव पर लगी हैं।

