नई दिल्ली। 25 दिसंबर, 2025। बांग्लादेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान गुरुवार को 17 वर्षों के लंबे स्व-निर्वासन के बाद अपने वतन लौट आए हैं। अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जायमा रहमान के साथ विशेष विमान से ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही बीएनपी (BNP) नेताओं और हजारों समर्थकों ने उनका अभूतपूर्व स्वागत किया। 2007 में गिरफ्तारी और फिर इलाज के लिए ब्रिटेन जाने के बाद से वे वहीं से पार्टी का संचालन कर रहे थे। उनकी यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब शेख हसीना की विदाई के बाद देश में राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है और फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों की सरगर्मियां तेज हैं।
60 वर्षीय तारिक रहमान की एंट्री ने न केवल मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार बल्कि जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी गुटों की भी नींद उड़ा दी है। शेख हसीना की अवामी लीग के बिखरने के बाद अब बीएनपी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फरवरी के चुनावों में रहमान प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार होंगे। हवाई अड्डे से सीधे एक विशाल जनसभा को संबोधित करने के बाद, वे अपनी बीमार मां खालिदा जिया से अस्पताल में मुलाकात करेंगे। उनकी वापसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले चुनाव बीएनपी और अन्य उभरते गुटों के बीच एक त्रिकोणीय और कड़ा मुकाबला होने जा रहे हैं।
अपनी वापसी के तुरंत बाद तारिक रहमान ने हालिया हिंसक विरोध प्रदर्शनों में मारे गए छात्र नेता उस्मान हादी की कब्र पर जाकर श्रद्धांजलि देने का निर्णय लिया है, जो युवाओं के साथ उनके जुड़ाव को दर्शाता है। रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश की चरमराई कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना और बिखर चुकी अर्थव्यवस्था को स्थिरता देना है। प्रशासन ने उनकी सुरक्षा के लिए राजधानी में अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। रहमान का लक्ष्य अब युवाओं के गुस्से को रचनात्मक दिशा देना और एक ऐसे ‘न्यू बांग्लादेश’ का विजन पेश करना है, जो भ्रष्टाचार मुक्त और लोकतांत्रिक हो। उनकी हर गतिविधि पर अब वैश्विक समुदाय की भी पैनी नजर बनी हुई है।

