ब्यावरा: बारिश के बाद अब कड़ाके की ठंड में भी जिले में हजारों की संख्या में बेसहारा गौवंश खुले आसमान के नीचे सडक़, चौराहों, हाइवे पर रहने को मजबूर है. जिले में बेसहारा गौवंश की संख्या का आंकड़ा एक लाख से ऊपर जा पहुंचा है जबकि गौशाला मात्र १५० ही संचालित है.गौवंश को पूरी तरह से संरक्षण एवं उनकी देखभाल करने की पहल करते हुए जिला प्रशासन द्वारा बेसहारा गौवंश की सुरक्षा हेतु उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखे जाने के सख्त निर्देश दिए गये बावजूद इसके आज भी हजारों की संख्या में गौवंश सडक़, चौराहो, हाईवे पर देखे जा सकते है.
बेसहारा गौवंश को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित करने के निर्देश देने के साथ ही कहा गया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर बेसहारा गौवंश को सुरक्षित करने के लिए सतत् देखरेख की जाये. अन्य मार्गो पर मनरेगा से कर्मचारी तैनात कर मवेशियों को सुरक्षित किया जाये ताकि सडक़, हाईवे, चौराहों पर विचरण करने वाले गौवंश सडक़ दुर्घटना का कारणन बने और उन्हें उचित आश्रम मिल सके.
कागजों तक सिमटे आदेश
बेसहारा गौवंश की सुरक्षा के लिए जारी आदेश मानों कागजों तक ही सिमट कर रहे गये. आज जिले भर में हजारों की संख्या में बेसहारा गौवंश सडक़ो पर रहने को मजबूर है. आये दिन सडक़ दुर्घटनाओं में गौवंश की मौत होने के मामले सामने आते रहे है, बारिश के बाद अब कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे गौवंश रह रहे है.
सडक़, चौराहों पर डेरा
नगर में ही बड़ी संख्या में बेसहारा गौवंश है. कही ठोर ठिकाना नहीं मिलने से सैकड़ो की संख्या में गौवंश नगर की सडक़, चौराहों पर देखे जा सकते है. व्यस्त यातायात के बीच गौवंश के जमावड़े से यातायात बाधित होकर आये दिन दुर्घटनाएं हो रही है. बेसहारा गौवंश की संख्या एक लाख से अधिक हाल ही में हुए गौवंश की गणना में जिले में ही बेसहारा गौवंश की संख्या एक लाख से अधिक बताई जाती है.
जबकि जिले में गौशालाओं की तादाद नाममात्र है. जानकारी के अनुसार जिले भर में 150 गौशालाएं संचालित है. जिनमें 111 से अधिक गौशालाएं शासकीय तथा अन्य गौशालाएं अशासकीय है. अधिकांशतः गौशाला में गौवंश के रहने की क्षमता 100 के आसपास है. इस तरह 15 हजार के आसपास ही गौवंश गौशालाओं में रह रहा है. जिले में बेसहारा गौवंश की संख्या को देखते हुए गौशालाओं की संख्या ऊंट के मुंह में जीरे के समान है
