
सिलवानी। गेहूं की बेहतर पैदावार और चमकदार दानों की चाह में किसानों द्वारा अत्यधिक यूरिया का उपयोग भविष्य में समस्या बन सकता है। कृषि अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही यूरिया का प्रयोग करें, जिससे फसल और भूमि दोनों सुरक्षित रहें। अधिकारियों के अनुसार जरूरत से अधिक नाइट्रोजन देने से फसल को नुकसान पहुंच सकता है और मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है।
शीतलहर के बीच किसान सिंचाई के साथ यूरिया का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन कई जगह तय मानक से अधिक मात्रा डाली जा रही है। कृषि विस्तारक अधिकारी सुनील मालवीय ने बताया कि यूरिया का प्रयोग चरणबद्ध रूप से पहली और तीसरी सिंचाई के समय निर्धारित मात्रा में करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित उपयोग से फसल स्वस्थ रहती है, जबकि अधिक यूरिया से मिट्टी की अम्लीयता बढ़ने का खतरा रहता है।
