भोपाल। लोक शिक्षण संचालनालय डीपीआई द्वारा शिक्षक चयन परीक्षा की प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2023 में जिन अभ्यर्थियों को नियमों के अनुसार पात्र नहीं माना जाना चाहिए था। उन्हें भी अब शिक्षक चयन परीक्षा 2025 की दस्तावेज जांच में बुलाया जा रहा है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि पात्रता परीक्षा 2023 के नियमों में साफ लिखा था, कि वही उम्मीदवार परीक्षा में बैठ सकते हैं जो जरूरी शैक्षणिक या व्यावसायिक योग्यता के अंतिम वर्ष में पढ़ाई कर रहे हों। जिनके पास उस समय योग्यता नहीं थी उन्हें परीक्षा देने का अधिकार नहीं था। नियमों में यह भी तय था, कि योग्यता की तारीख वही मानी जाएगी, जो विज्ञापन में दी गई थी। शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के नियम भी इसी बात को मानते हैं। इसके बावजूद दस्तावेज जांच में 2024–25 तक की योग्यता को मान्य किया गया है। इससे ऐसे अभ्यर्थियों को फायदा मिल रहा है, जो पात्रता परीक्षा के समय न तो अंतिम वर्ष में थे और न ही योग्य थे।
अभ्यर्थी 1
ऐसी प्रक्रिया से सही और मेहनती उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो रहा है। अपात्र लोग चयन प्रक्रिया में आयेंगे तो भर्ती की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
अभ्यर्थी 2
मैंने जब परीक्षा दी थी तो मैं योग्य था और परीक्षा भी पास कर ली। लेकिन 2024–25 के अयोग्य अभ्यर्थियों को मौका मिलने से 2023 के योग्य अभ्यर्थियों का चयन का अवसर छिन जाएगा।
अभ्यर्थी 3
डीपीआई द्वारा शिक्षकों की चयन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं लगती। अपने ही बनाए नियमों का पालन नहीं कर रहे. सालों से तैयारी करके परीक्षा पास करने के बाद अपात्र अभ्यर्थियों को मौका देने से प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है।
अभ्यर्थियों की मांग
डीपीआई से हमारी मांग है कि दस्तावेज जांच उसी तारीख के आधार पर किया जाए। जो पात्रता और चयन परीक्षा के नियमों में तय है। साथ ही जो अभ्यर्थी नियमों के खिलाफ परीक्षा में शामिल हुए थे। उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर किया जाए। अभ्यर्थियों कहना है कि अगर समय रहते गलती नहीं सुधारी गई तो कई योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होगा।
