खंगाले गए रिकार्ड, सोमवार को सौपा जायेगा प्रतिवेदन
रीवा: जिला पंचायत में करोड़ो रूपये के हुए वाटरशेड़ घोटाले सहित अन्य अनियमितता को लेकर की गई शिकायत की जांच करने पहुंची तीन सदस्यीय राज्य स्तरीय टीम दस्तावेज खंगालने के बाद शुक्रवार को वापस हो गई. बुधवार से लेकर शुक्रवार तक बंद कमरे में जांच टीम दस्तावेजो का अवलोकन करती रही. शिकायतकर्ता से टीम नही मिली और वापस लौट गई. घोटाले के अहम दस्तावेज टीम के हाथ लगे है, संभवत: सोमवार को टीम अपना प्रतिवेदन शासन को सौपेगी.
उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत में वाटरशेड कार्य में करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े की शिकायत के बाद जो तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी उसमें पंचायत राज संचालनालय के संयुक्त संचालक गोपाल खुराना के नेतृत्व में वाटरशेड के दस्तावेजों की पड़ताल की गई. शिकायत कई बार हुई लेकिन मामले को दबा दिया गया. इस बार प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास घोटाले को लेकर बेहद गंभीर है. तीन दिन से चल रही जांच की लगातार मानीटरिंग कर रही थी.
बगैर कार्य के भुगतान करने का मामला
जिले में वाटर लेबल बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्टाप डैम, रपटा निर्माण कार्य के लिए शासन ने वाटरशेड योजना चालू की थी. जिसमें जिले की 420 ग्राम पंचायतों में भी जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य किए जाने थे. इस योजना के ओआईसी परियोजना अधिकारी संजय सिंह को बनाया गया था. सूत्रों की मानें तो ज्यादातर ग्राम पंचायतों में रपटा एवं वाटरशेड के कार्य नहीं कराए गए और उसका भुगतान कर दिया गया. इस तरह से जिले में तकरीबन 25 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले करने का मामला सामने आया था. इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता कमल सिंह द्वारा शासन स्तर पर शिकायत की गई थी. जिसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय दल रीवा भेजा गया था, शुक्रवार को दल वापस रवाना हुआ.
कई करोड़ के भ्रष्टाचार का अनुमान
वाटरशेड़ घोटाले की जांच भोपाल से पहुंची टीम ने तीन दिन तक की. फाइलो का अम्बार लगा था एक-एक दस्तावेज टीम ने खंगाले. जिला पंचायत से जुड़े सूत्रो की माने तो जांच टीम के हाथ ऐसे कई फाइल लगी है जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि 15 से 20 करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार किया गया है. कार्यों का अनुमोदन जिला कलेक्टर के माध्यम से किया गया था परंतु उक्त फाइलों को जहां से गुजरना था वहां नहीं पहुंचाई गई. ऐसी स्थिति में बिना मूल्यांकन के ही भुगतान करना बताया गया है. करोड़ो का घोटाला सामने आ सकता है. जांच प्रतिवेदन शासन को प्रस्तुत किया जायेगा, उसके बाद ही कहा जा सकता है कि कितने करोड़ की राशि का बंदरबांट किया गया है
