महाकुंभ में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए नई कवायद

उज्जैन: सिंहस्थ 2028 जैसे विशाल आयोजन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और अनुमान है कि इस दौरान शहर में लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचेंगे. इतनी बड़ी आवक के चलते वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका है, जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तैयारियां तेज कर दी हैं. अब कार्यालय के परिसर में कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है.महाकुंभ के दौरान शहर की हवा का रुख क्या रहेगा, उसको लेकर तकनीकी टीम प्लान बना रही है. महाकाल क्षेत्र, हरिफाटक, मंगलनाथ मार्ग से लेकर सिंहस्थ क्षेत्र के साथ ही शहर की प्रमुख सड़कों पर सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है, इसलिए वायु गुणवत्ता की सटीक निगरानी और नियंत्रण के लिए हाईटेक सिस्टम स्थापित किया जा रहा है.

प्रदूषण बोर्ड के कंट्रोल रूम में लगी थी आग
महाकाल मंदिर परिसर में एयर मलिटी मैनेजमेंट सिस्टम में आग लगने की घटना 5 मई 2025 को हुई थी,तब शंख द्वार के समीप लगाए गए ्रक्तरूस् की बैटरी में शॉर्ट सर्किट के कारण आग भड़की थी,जिसमें उपकरण और ्रष्ट सहित पूरा सेटअप जल गया था. अनुमानित 5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, हालांकि सौभाग्य से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई. केवल एक कर्मचारी के हाथ झुलसने की मामूली चोट दर्ज हुई. उस दौरान आग बुझाने के लिए दमकल दल ने तत्काल हस्तक्षेप किया, सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए दर्शन भी रोके गए और बाद में फिर से शुरू किए गए. घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि तीर्थ क्षेत्र जैसी संवेदनशील जगह पर सुरक्षा और तकनीक दोनों को मजबूत बनाना अनिवार्य है.

घटना ने दिखाई राह
अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस घटना से सबक लेते हुए महाकाल परिसर में उपकरण लगाने के बजाय सीएएक्यूएमएस को भरतपुरी स्थित प्रदूषण कार्यालय में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है. नया हाईटेक कंट्रोल रूम इसी कार्यालय परिसर में बनाया जा रहा है, जहां उपकरणों को सुरक्षित रखा जाएगा और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी.

क्षेत्रीय अधिकारी काले का नवाचार
प्रदूषण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक काले द्वारा जिस प्रकार से नए कंट्रोल रूम को बनाने की तैयारी की जा रही है, ऐसे में इसे नवाचार के तहत देखा जा रहा है जो सिंहस्थ के मद्देनजर बहुत उपयोगी साबित होगा, कुल उद्देश्य है कि वायु गुणवत्ता की मॉनिटरिंग लगातार होती रहे और महाकुंभ जैसे अति संवेदनशील अवसर पर सिस्टम पूर्ण रूप से सुरक्षित व सक्रिय रहे.

तत्काल प्रदूषण कंट्रोल हो सके
सिंहस्थ के दौरान शहर में वाहनों का दबाव बढ़ेगा, रैलियां, पूजन-अनुष्ठान, धूल, धुआं और अन्य गतिविधियां वायु प्रदूषण को बढ़ा सकती हैं. इन परिस्थितियों में बोर्ड एयर मलिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों को उन्नत कर रहा है, ताकि हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा रीयल टाइम में नापी जा सके और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाए जाएं. बोर्ड वेंटिलेशन प्लान, डस्ट कंट्रोल, स्मॉग स्तर की रोकथाम और संवेदनशील क्षेत्रों के लिए आपात प्रतिक्रिया योजना पर भी कार्य कर रहा है.

 

भारी भीड़ में पर्यावरणीय चुनौती
सिंहस्थ 2028 केवल धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर नहीं, बल्कि प्रशासनिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी चुनौती है. महाकाल क्षेत्र में बीती घटना ने यह सिखा दिया कि तकनीक की सुरक्षा सर्वोपरि है. इसलिए नए कंट्रोल रूम, सुरक्षित उपकरण और निरंतर मॉनिटरिंग की व्यवस्था के साथ शहर इस बार प्रदूषण नियंत्रण के बेहतर प्रबंध का प्रयास कर रहा है, ताकि श्रद्धालु स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण में दर्शन कर सकें और महाकुंभ का आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हो सके

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