
रीवा। उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी और लगातार चल रही शीत लहर के चलते हाड़ कपाने वाली ठंड पड़ रही है. पिछले दो दिन से भीषण ठंड से जन जीवन बुरी तरह से प्रभावित है. रविवार को समूचा जिला कोहरे के चादर से ढक़ा रहा.
सुबह 11 बजे तक घना कोहरा रहा और दोपहर 1 बजे तक कोहरे का धुंध छाने से सूर्यदेव के दर्शन 2 बजे हुए. अन्य दिनो के अपेक्षा रविवार को दिन का अधिकतम तापमान सामन्य से 10 डिग्री नीचे 17 डिग्री पर आ गया तो वही रात का न्यूनतम तापमान 7 डिग्री पर स्थिर रहा. एक दिन पहले दिन का अधिकतम तापमान 21 डिग्री था लेकिन सीधे 4 डिग्री की गिरावट आई है, दिन भर लोग कांपते नजर आए. धूप निकलने के बाद कुछ घंटो की राहत मिली और उसके बाद फिर से कोहरे का धुंध छाने लगा. दिन भर लोग ठंड से कापते नजर आए, शीत लहर ने ठंड को बढ़ा दिया है. दरअसल अन्य दिनो के अपेक्षा रविवार को दिन के तापमान में ज्यादा गिरावट आने के कारण ठंड बढ़ गई. अभी यह ठंड लगातार जारी रहेगी साथ ही कोहरा भी बना रहेगा. सुबह हालत यह थी कि सडक़ो पर कोहरा इतना था कि दस मीटर तक कुछ दिखाई नही दे रहा था. 9 बजे के बाद धीरे-धीरे कोहरे का असर कम हुआ. इस समय हाइवे में कोहरे के कारण हादसे हो रहे है. रीवा-प्रयागराज मार्ग में अभी तक चार हादसे हो चुके है. जब तक कोहरा रहेगा तब तक इस तरह के हादसे होते रहेगे. लगातार शीत लहर चल रही है जिसके कारण ठंड बढ़ गई है. समूचा जिला शीत लहर के चपेट में है. केवल अलाव ही ठंड से बचने का एक सहारा है. हालत यह है कि रात 8 बजे से बाजार में दुकानो के शटर गिर जाते है और 9 बजे से सन्नाटा हो जाता है.
शाम 4 बजे पहुंची रीवा-आनंद बिहार
उत्तर भारत में पड़ रहे घने कोहरे के चलते इस समय रीवा-आनंद बिहार ट्रेन समय पर नही पहुंच पा रही है. लगातार समय से लेट आ रही है. शनिवार को जहा रात 8 बजे पहुंची थी, वही रविवार को शाम 4 बजे रीवा स्टेशन पहुंची. जबकि आने का समय सुबह 11.10 बजे है और वापस जाने का समय 4.20 बजे है. लेकिन समय पर न आने के कारण यात्रियो की फजीहत हो रही है. जब तक कोहरा रहेगा तब तक इसी तरह समय पर ट्रेन नही पहुंचेगी. रविवार को 4 बजे आने एक घंटे बाद आनंद बिहार के लिये रवाना हुई. घने कोहरे और ठंड के चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है. ट्रेन में सफर करने वाले यात्री भी परेशान हो रहे है खासकर बच्चे और वृद्धजन, रीवा के अधिकांश यात्री प्रयागराज में ही उतर रहे है ताकि समय पर घर पहुंच सके.
