
सुसनेर।उज्जैन से गरोठ और गरोठ से कोटा तक फोरलेन सडक़ के निर्माण और चालू होने के बाद आगर-मालवा से गुजरने वाला उज्जैन-झालावाड़ मार्ग व्यापारिक दृष्टिकोण से पिछड़ता जा रहा है. पहले जिस सडक़ पर दिन-रात वाहनों की आवाजाही बनी रहती थी. अब वहां सन्नाटा पसरने लगा है. वाहनों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे होटल, ढाबा, पेट्रोल पंप, ऑटोमोबाईल और अन्य सडक़ आधारित व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं.
स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि यह मार्ग हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान से उज्जैन व इंदौर की ओर जाने वाले ट्रकों और अन्य व्यवसायिक वाहनों की पहली पसंद था, लेकिन अब गरोठ होते हुए कोटा मार्ग फोरलेन बन जाने से ड्राइवर सीधे उसी रास्ते को चुन रहे हैं. जहां सडक़ बेहतर और समय की बचत हो रही है. नतीजतन, आगर-मालवा में रुकने वाले वाहनों की संख्या कम हो गई है. स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि सरकार को चाहिए कि वह उज्जैन-झालावाड़ मार्ग को भी फोरलेन बनाने की दिशा में त्वरित निर्णय ले. यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आने वाले समय में स्थानीय व्यवसाय पूरी तरह ठप हो सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि होटल और ढाबा व्यवसाय में 40 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है और पेट्रोल पंपों पर बिक्री में भी बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है.
