भोपाल: मंच पर जैसे ही शहीद उधम सिंह की प्रतिमा से संवाद शुरू हुआ, दर्शक वर्तमान से सीधे इतिहास के सबसे दर्दनाक और ज्वलंत अध्याय में पहुंच गए। सुदेश शर्मा के निर्देशन और सी.एस. सिंधरा के लेखन में तैयार नाटक शहीद उधम सिंह आजाद ने जलियांवाला बाग से लेकर लंदन के कॉक्सटन हॉल तक के संघर्ष को बेहद सशक्त ढंग से सामने रखा।शहीद भवन के मंच पर गुरुवार शाम यह प्रस्तुति केवल नाटक नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए एक स्पष्ट संदेश बनकर उभरी।
नाटक की शुरुआत आज के दौर से होती है, जहां शहीद उधम सिंह की प्रतिमा को लेकर समाज में फैली अराजकता, जाति और धर्म के नाम पर खींचतान दिखाई देती है। इसी टकराव के बीच मंच पर उधम सिंह का अतीत जीवंत होता है। जलियांवाला बाग के नरसंहार की पीड़ा, खून से सनी मिट्टी की कसम और 24 वर्षों बाद जनरल ओ डायर को सजा देने का संकल्प, हर दृश्य मंच पर गहराई के साथ उभरता है।
मंचन की खास बात यह रही कि इतिहास को केवल घटना के रूप में नहीं, बल्कि आज के समाज से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने संवादों के साथ अपने हावभाव और भावनाओं से शहीदों की पीड़ा और चेतावनी को प्रभावी बनाया। गुरुदेव का सूत्रधार रूप दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर गया, जबकि उधम सिंह का जीवंत होना पूरे नाटक का सबसे सशक्त क्षण बन गया। नाटक मंचन में कलाकारों की गतिशील प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
