संजय टाईगर रिजर्व में बाघों का तेजी से बढ़ रहा कुनबा, 33 बाघ एवं शावकों से गुलजार हुआ

सीधी: जिले का संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र इन दिनों बाघों से गुलजार हो चुका है। टाईगर रिजर्व क्षेत्र में बाघों का कुनबा बढऩे के बाद स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि यहां का वातावरण बाघों को खूब भा रहा है। यहां के वन क्षेत्र को बाघ अपना सुरक्षित रहवास बना चुके हैं।साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि वर्ष 2018 में पहले यहां पर बाघों की संख्या महज 6 थी लेकिन अब वह बढक़र 33 हो गई है। हाल ही में टाईगर रिजर्व क्षेत्र में वन्य जीवों की गणना का कार्य पूर्ण कर एकत्रित किये गये डाटा को प्रयोगशाला जांच के लिये देहरादून भेजा गया है। करीब एक सप्ताह में वहां से वन्य जीवों की गणना के संबंध में वास्तवित रिपोर्ट सामने आ जायेगी।

टाईगर रिजर्व क्षेत्र में बढ़ रही बाघों की संख्या प्रदेश के लिए शुभ संकेत दे रहे हैं। बाघों की संख्या बढ़ाने में टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कुशल प्रबंधन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बाघों के रिहायशी इलाके को बढ़ाने के लिए लगभग 17 गांवों को खाली भी करा दिया गया है ताकि बाघ यहां स्वच्छंद रूप से विचरण कर सकें। बाघों की सुविधा के लिए वन क्षेत्रफल तो बढ़ाया ही जा रहा है साथ ही साथ उनके शिकार के लिए बांधवगढ़ से चीतलों को भी लाया गया। जंगली सुअर और जंगली भैंसों के कारण बाघों को शिकार करने में भी आसानी हो रही है। वहीं नन्हें शावकों के लिए छोटे-छोटे तालाब भी बनाए गए हैं।

समय-समय पर सभी की मॉनिटरिंग भी प्रबंधन के द्वारा की जा रही है। लिहाजा यहां बाघों को सभी सुविधाएं मुहैया हो रही हैं। टाईगर रिजर्व क्षेत्र में रहने वाले बाघों को आसानी के साथ शिकार उपलब्ध हो रहे हैं। बाघों को पर्याप्त मात्रा में शिकार उपलब्ध हो इसके लिए संजय टाईगर रिजर्व के अधिकारियों द्वारा भी छोटे वन्य जीवों को बड़ी संख्या में छोडऩे का क्रम जारी रखा गया है। जब भी मानीटरिंग के दौरान मालुम पड़ता है कि टाईगर रिजर्व क्षेत्र में छोटे वन्य जीवों की संख्या कम हो गई है बाहर से लाकर संख्या को बढ़ा दिया जाता है। संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र में बाघों के अनुकूल सभी सुविधाओं का विस्तार काफी तेजी के साथ किया जा रहा है।

साथ ही टाईगर रिजर्व क्षेत्र के अंदर अभी करीब 3 दर्जन गांव आबाद हैं। जिनका जल्द से जल्द विस्थापन किया जाना काफी आवश्यक है। विस्थापित होने वाले परिवारों के लिए संजय टाईगर रिजर्व द्वारा 15 लाख की रकम के साथ ही घर एवं अन्य सम्पत्तियों का मुआवजा भी दिया जा रहा है। फिर भी इसमें बाहर से आकर फर्जी विस्थापित बनने वाले लोगों द्वारा विस्थापन में पेंच फंसाने का कार्य सालों से किया जा रहा है। उनके द्वारा इसके लिए राजनैतिक एवं सामाजिक संगठनों से भी दवाब बनाने का सहारा लिया जा रहा है। वहीं कुसमी क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए विस्थापन की कार्यवाही अब सख्ती के साथ होनी चाहिए, जिससे यहां की रौनक बढ़ सके।
पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बने बाघ
संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र के अंदर के गांवों का विस्थापन पूर्णरूप से न होने के कारण यह अभी अपने अस्तित्व में पूरी तरह से नहीं आ पा रहा है। टाईगर क्षेत्र के अधिकारियों द्वारा वर्षों से चल रही विस्थापन की कार्यवाई को पूर्ण कराने में प्रयासरत हैं। फिर भी यहां बाघों की संख्या में हो रहे इजाफा के चलते आने वाले पर्यटकों का मुख्य केन्द्र बिन्दु बाघ ही बने हुये हैं। पर्यटन नक्शे में संजय टाईगर रिजर्व सीधी के आने के बाद से ही यहां पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये लगातार सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। जिसमें पर्यटकों के ठहरने के लिये रिसॉर्ट एवं देशी हट की सुविधा भी उपलब्ध करायी जा रही है। वहीं देश एवं विदेश के पर्यटकों को यहां सुविधा उपलब्ध कराने के लिये ऑनलाईन बुकिंग की सुविधा भी दी गई है।
इनका कहना है
संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र में हाल ही में टीम द्वारा वन्यजीवों की गणना का कार्य पूर्ण किया गया है। यहां से एकत्रित किये गये डाटा को देहरादून भेजा गया है। वहां से विश्लेषण के पश्चात वन्य जीवों की संख्या के संबंध में करीब एक सप्ताह में वास्तविक रिपोर्ट आ जायेगी। यह अवश्य है कि इससे पूर्व की गणना में संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र में बाघों की संख्या 33 थी।
राजेश कन्ना टी, डीएफओ टाईगर रिजर्व सीधी

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