प्रियंका सिंह छतरपुर। जिले में औद्योगिक विकास की कमान संभालने वाला जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र इस समय खुद गंभीर अव्यवस्था के दौर से गुजर रहा है। हालात यह हैं कि विभाग में स्वीकृत पदों की तुलना में कर्मचारियों की संख्या बेहद कम रह गई है। कुल 17 पदों में से मात्र 4 अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि शेष 13 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इसका सीधा असर जिले की औद्योगिक गतिविधियों पर साफ नजर आ रहा है।
कार्यालय में सन्नाटा, योजनाएं फाइलों में उलझीं
डीआईसी कार्यालय में दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है। उच्च अधिकारियों की नियमित मौजूदगी न होने से न तो उद्यमियों की समस्याओं पर सुनवाई हो पा रही है और न ही किसी तरह के निर्णय समय पर लिए जा रहे हैं। संभागीय स्तर के अधिकारी पर कई जिलों का जिम्मा है। परिणामस्वरूप निवेश प्रस्तावों और नई औद्योगिक इकाइयों से जुड़ी फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रहीं।
चार कर्मचारियों पर पूरे जिले का बोझ
वर्तमान में उपलब्ध सीमित स्टाफ पर योजनाओं के क्रियान्वयन, औद्योगिक क्षेत्रों के निरीक्षण, निवेशकों की फाइलों की जांच और शिकायतों के समाधान का पूरा भार है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक सुस्ती को उजागर करती है, बल्कि औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर भी प्रश्नचिह्न लगा रही है।
रोजगार योजनाओं पर भी असर
कर्मचारियों की कमी का प्रभाव स्वरोजगार और उद्यमिता से जुड़ी योजनाओं पर भी पड़ रहा है। आवेदन लंबित हैं, स्वीकृतियां अटकी हुई हैं और उद्यमी महीनों से कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। रिक्त पदों की जानकारी उच्च स्तर पर भेजे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
