
भोपाल। पूर्व गृहमंत्री एवं कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने आज प्रदेश में सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर कानून-व्यवस्था को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह विभाग के संचालन में लापरवाही के कारण प्रदेश में “प्रशासनिक शिथिलता और अराजकता” जैसी स्थिति बन गई है।
मीडिया से बातचीत में बच्चन ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर व्यवस्था पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘विकास और सेवा’ जैसे नारे अब केवल प्रचार तक सीमित रह गए हैं। पिछले दो वर्षों को उन्होंने “छल और कर्ज का दौर” बताते हुए कहा कि प्रदेश का हर नागरिक औसतन करीब 50 हजार रुपये के आर्थिक बोझ से जूझ रहा है, जबकि महिलाओं और यहां तक कि पुलिसकर्मियों की सुरक्षा भी गंभीर रूप से कमजोर हुई है।
पूर्व गृहमंत्री ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए हिरासत में मौतों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और पुलिस बल में अनुशासनहीनता बढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जब सुरक्षा बल स्वयं असुरक्षित महसूस करें, तो आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर बच्चन ने दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरे अंतर की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना जैसी योजनाओं पर भारी खर्च के बावजूद प्रदेश महिलाओं के लिए असुरक्षित बना हुआ है, जहां यौन अपराध, लापता लड़कियों और मानव तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने उच्च न्यायालय की विभिन्न पीठों में बलात्कार और पॉक्सो मामलों के बड़ी संख्या में लंबित होने का भी उल्लेख किया।
बच्चन ने संगठित अपराध, नशा तस्करी और साइबर धोखाधड़ी को संरक्षण मिलने का आरोप लगाया तथा भोपाल और इंदौर मेट्रो जैसी परियोजनाओं में हो रही देरी की आलोचना की। उन्होंने कथित पुलिस अत्याचारों की न्यायिक जांच, गंभीर आरोपों से घिरे पदाधिकारियों को हटाने और लापता महिलाओं व बालिकाओं की तलाश के लिए विशेष कार्यबल गठित करने की मांग की।
