अंतरराष्ट्रीय जनमंगल सम्मेलन में संतों और जनप्रतिनिधियों ने लिया हर माह–एक उपवास का संकल्प

नयी दिल्ली, (वार्ता) राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में दो दिवसीय ‘अंतरराष्ट्रीय जनमंगल सम्मेलन’ में शुक्रवार को संतों और जनप्रतिनिधियों ने ‘हर माह-एक उपवास’ का संकल्प लिया।

यह सम्मेलन योग, अध्यात्म और उपवास साधना के संगम के रूप में हुआ। यह सम्मेलन योग गुरु स्वामी रामदेव और जैन संत अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज की अगुवाई में एक जनआंदोलन बनाने का प्रयास है। जनमंगल की सम्यक दृष्टि—उपवास, ध्यान, योग व स्वदेशी चिंतन विषय पर आधारित इस सम्मेलन में देश भर के संतों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और लाखों अनुयायियों ने भाग लिया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यक्रम में अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि भारत मंडपम आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विज्ञान का एक अद्भुत केंद्र बन रहा है। उन्होंने आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के तप, त्याग और आत्मविकास के पथ को अद्वितीय बताते हुए इसे अध्यात्म और कर्मयोग का दिव्य संगम कहा, जो देश–दुनिया तक एक नया संदेश देगा। श्री बिरला ने स्वयं भी ‘हर माह–एक उपवास’ का संकल्प लेते हुए कहा कि उपवास इंद्रियों पर नियंत्रण और मन–शरीर की शुद्धि का श्रेष्ठ माध्यम है।

अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने उपवास को “आत्मिक ऊर्जा को जगाने वाला दिव्य साधन” बताया। उन्होंने कहा कि उपवास तन, मन और आत्मा को शुद्ध करता है, क्रोध शांत करता है, ध्यान को गहरा बनाता है और शरीर को प्राकृतिक उपचार की अवस्था में ले जाता है। उन्होंने उपवास को “आसक्ति से मुक्ति और आत्मबल बढ़ाने” का मार्ग बताया।

सम्मेलन में स्वामी रामदेव ने कहा कि हर मत, पंथ और परंपरा में उपवास का विशेष महत्व है क्योंकि यह शरीर, मन और अंतःकरण की शुद्धि का माध्यम है। उन्होंने आचार्य प्रसन्न सागर महाराज की 557 दिनों के निरंतर उपवास और अब तक 3,500 से अधिक उपवास करने की तपस्या का उल्लेख करते हुए उन्हें उपवास शिरोमणि बताया।

जैन मुनि पीयूष सागर महाराज ने उपवास को स्वास्थ्य की आधारशिला बताते हुए कहा कि उपवास प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को मजबूत करता है।

पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण महाराज ने कहा कि अत्यधिक भोजन रोगों का कारण है और उपवास ही बड़ा साधक बनाता है। उन्होंने कहा कि स्वयं कम खाइये और भूखों को खिलाइये—यह भी एक प्रकार का उपवास है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि स्वामी रामदेव ने न केवल योग और आयुर्वेद का प्रचार किया, बल्कि भारतीय शिक्षा बोर्ड बनाकर स्वदेशी शिक्षा की नई दिशा दी है, जो 2047 के विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगी।

प्रसिद्ध लीवर विशेषज्ञ डॉ. एस.के. सरीन ने उपवास के वैज्ञानिक पहलुओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उपवास ऑटोफेजी को सक्रिय करता है, फैटी लिवर सहित कई रोगों से राहत देता है और दीर्घायु के लिए सबसे प्रभावी तरीका है।

दिल्ली के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने उपवास को शरीर की शुद्धि का महायज्ञ कहा और सप्ताह में एक उपवास करने की सलाह दी। सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने भी उपवास का संकल्प लिया।

सम्मेलन में भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन एनपी सिंह, आचार्य लोकेश मुनि, महंत बालकनाथ योगी, बाबा सत्यनारायण मौर्य, डॉ. अनुराग वार्ष्णेय, डॉ. यशदेव शास्त्री, साध्वी देवप्रिया और बहन ऋतम्भरा ने भी उपस्थिति दर्ज की और उपवास विज्ञान पर अपने विचार व्यक्त किए।

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