स्वस्थ जीवनशैली और शांत मन से मिलेगी चेहरे की सुंदरता

भोपाल: चेहरे की चमक, त्वचा का स्वास्थ्य और शरीर का सौंदर्य केवल बाहरी देखभाल का परिणाम नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध मस्तिष्क की गतिविधियों, भावनात्मक स्थिति और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (शरीर का वह हिस्सा है जो स्वेच्छा से नियंत्रित नहीं होने वाली क्रियाओं को नियंत्रित करता है) से होता है। एम्स भोपाल के प्रोफेसर डॉ वरुण मल्होत्रा ने बताया कि अच्छा भोजन, पर्याप्त विश्राम, नियमित गतिविधि और शांत मन न केवल शरीर बल्कि चेहरे की चमक में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह विचार उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित एसोसिएशन ऑफ फिजियोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया के 11 वें वार्षिक सम्मेलन में व्यक्त किए। शोध में बताया गया कि तनाव, भावनाएं, हार्मोनल संतुलन और जीवनशैली में बदलाव सीधे तौर पर चेहरे की बनावट और त्वचा की सेहत पर असर डालते हैं। डॉ मल्होत्रा ने कहा कि सुंदर दिखना केवल त्वचा की सतह तक सीमित नहीं है। मस्तिष्क की प्रतिक्रियाएं, भावनाओं का उतार-चढ़ाव और शरीर के तापमान व नमी का संतुलन भी इसमें शामिल होता है। उन्होंने आधुनिक जीवनशैली चिकित्सा को संतुलित जीवन, ध्यान और मानसिक शांति के सिद्धांतों से जोड़कर कहा कि सुंदरता के लिये यह सब जरूरी है.
सम्मेलन में एम्स भोपाल की अहम भागीदारी
बेंगलुरु स्थित निमहांस में हुए इस राष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ वरुण मल्होत्रा ने ऑटोनॉमिक कॉस्मेटोलॉजी विषय पर आयोजित वैज्ञानिक सत्र की अध्यक्षता की। यह सत्र एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर माधवानंद कर के मार्गदर्शन में हुआ। इसमें देशभर के विशेषज्ञों ने बताया कि सौंदर्य, त्वचा की गुणवत्ता और बढ़ती उम्र के प्रभावों को समझने में मस्तिष्क और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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