
जबलपुर। भंवर ताल गार्डन आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा से सराबोर नजर आया। ओशो के 94वें जन्मोत्सव पर उत्सव सत्संग में देश और विदेश से आए अनुयायियों ने बड़े उत्साह और भक्ति भाव के साथ इस मौके को मनाया। गार्डन में हर जगह ध्यान साधना और शांतिपूर्ण गतिविधियां चल रही थीं। भंवर ताल गार्डन में ओशो का जन्मोत्सव न केवल उनके विचारों और ध्यान साधना की महत्ता को उजागर कर रहा था, बल्कि यह शहर और देश-विदेश से आए अनुयायियों के बीच एकता, श्रद्धा और आध्यात्मिक प्रेम का प्रतीक भी बना। ओशो के 94वें जन्मोत्सव के साथ ही देवताल स्थित ओशो अमृतधाम आश्रम के भी 50 वर्ष पूर्ण हो गए हैं।
स्मृतियों में खोए अनुयायी, हुए भावुक
भंवर ताल गार्डन में स्थित बोधि वृक्ष आज मुख्य आकर्षण था। श्रद्धालु इस वृक्ष से लिपटकर ओशो को याद कर रहे थे। वृक्ष की ठंडी छाया और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता ने माहौल को और भी दिव्य बना दिया था। कई लोग ध्यान साधना में गहरे लीन थे, वहीं कुछ लोग स्मृतियों में खोए हुए भावुक नजर आए।
देश-विदेश से आए श्रद्धालु
अनुयायियों की बड़ी संख्या ने इस उत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया। ओशो के जन्मोत्सव पर जबलपुर में देश-विदेश से आए अनुयायी ध्यान साधना में पूरी तरह से लीन थे, गार्डन में शांति और श्रद्धा का अनुभव हर कदम पर महसूस किया जा सकता था।
