सीहोर। जिले की रेहटी तहसील के ग्राम मकोडिय़ा निवासी एक किसान ने अपने परिवार के 20 सदस्यों के साथ इच्छामृत्यु की अनुमति देने के लिए राज्यपाल को लिखा पत्र तहसीलदार को सौंपा है. पीडि़त किसान का कहना है कि रेलवे द्वारा उनकी अधिग्रहित की गई जमीन का जो मुआवजा दिया जा रहा है. उससे वह एक एकड़ भी जमीन नहीं खरीद पा रहे हैं.
रेहटी तहसील के ग्राम मकोडिय़ा निवासी शिवनारायण चंद्रवंशी व उनके भाई देवचरण चंद्रवंशी परिवार की 10.5 एकड़ जमीन रेलवे लाईन बिछाने के लिए अधिग्रहित की गई है. कृषक शिवनारायण की मानें तो उनकी जमीन में टयूबवेल व पक्का मकान बना हुआ है. हमारी अधिग्रहित जमीन की मुआवजा राशि के नाम पर महज 8 लाख 62 हजार रुपए ही दिया गया है. जबकि उनकी जमीनों का बाजार भाव 65 लाख रुपए प्रति एकड़ है. किसानों ने पत्र में कहा खेती ही हमारी आजीविका का एकमात्र साधन है। रेलवे द्वारा दी गई मुआवजा राशि से हम एक एकड़ जमीन भी नहीं खरीद पा रहे हैं. पूरी जमीन अधिग्रहित हो जाने और मुआवजा बेहद कम मिलने के कारण हमारे परिवार के भरण-पोषण का भयानक संकट खड़ा हो गया है.
दोनों किसान भाईयों ने मायूस होकर तहसीलदार से कहा कि जब उनकी जमीन की कीमत बाजार भाव के अनुसार नहीं दी जा रही है तो वह इतनी कम मिली मुआवजा राशि से दूसरी जगह जमीन कैसे खरीद सकेंगे. इस दौरान उन्होंने कहा कि इससे तो अच्छा है कि सरकार हमें परिवार सहित मरने की अनुमति प्रदान करे. किसान चंद्रवंशी ने बताया कि उनकी जमीन काफी उपजाऊ है तथा इससे साल भर में इतनी आय हो जाती है कि 20 सदस्यीय परिवार का आसानी से भरण पोषण हो जाता है, लेकिन जब से रेलवे लाईन के लिए उनकी बेशकीमती जमीन का अधिग्रहण कर इमना कम मुआवजा दिया गया है तब से परिवार के सभी सदस्यों का सुख चैन छिन गया है. वह न ढंग से खा पा रहे हैं और न ही रातों को सो पा रहे हैं.
पीडि़त परिवार ने शासन के समक्ष रखी मांगें
किसान परिवार ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए प्रशासन और रेलवे से निम्नलिखित मांगें पूरी करने की अपील की है कि रेलवे द्वारा उपजाऊ, प्रधानमंत्री सड़क से लगी हुई और गांव के आसपास ही जमीन दी जाए. यदि जमीन नहीं दी जा सकती तो कम से कम मुआवजा राशि बाजार मूल्य 65 लाख प्रति एकड़ के बराबर दी जाए. परिवार के दो सदस्यों को रेलवे में नौकरी दी जाए या परिवार के अवयस्कों की देखभाल, पढ़ाई, लिखाई एवं उनके भरण-पोषण की जीवन पर्यंत व्यवस्था रेलवे द्वारा की जाए. खेत में बने पक्के मकान के बदले पक्का मकान भी बनाकर दिया जाए.जब तक मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक उनकी जमीनों का अधिग्रहण नहीं किया जाए। पीडि़तों ने पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव समेत स्थानीय कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई है.
इन लोगों ने मांगी है इच्छामृत्यु
शिवनारायण चंद्रवंशी पिता विजय सिंह आयु 55 वर्ष, कृष्णा बाई पत्नी शिवनारायण चंद्रवंशी आयु 50 वर्ष, अशोक कुमार पिता शिवनारायण आयु 35 वर्ष, दीपक आ. शिवनारायण चंद्रवंशी, मोनिका बाई पत्नी अशोक कुमार आयु 33 वर्ष, ज्योति बाई पत्नी दीपक कुमार आयु 32 वर्ष, देवांग चंद्रवंशी पिता अशोक कुमार आयु 11 वर्ष, आरव चंद्रवशी पिता अशोक कुमार आयु 7 वर्ष, सारांशी चंद्रवंशी पिता दीपक कुमार आयु 8 वर्ष, धुशाल चंद्रवंशी पिता दीपक कुमार आयु 3 वर्ष, देवचरण चंद्रवंशी पिता विजय सिंह आयु 60 वर्ष, कांता बाई पत्नी देवचरण सिंह आयु 55 वर्ष, अखिलेश पिता देवचरण सिंह आयु 38 वर्ष, सुषमा पत्नी अखिलेश कुमार आयु 35 वर्ष, धर्मेंद्र कुमार पिता देवचरण सिंह आयु 35 वर्ष, दीपिका बाई पत्नी धर्मेंद्र कुमार आयु 33 वर्ष, आकृति पिता धर्मेंद्र कुमार आयु 10 वर्ष, माही पिता अखिलेश कुमार आयु 16 वर्ष, नैतिक पिता अखिलेश कुमार आयु 12 वर्ष व आदविक पिता धर्मेंद्र कुमार आयु 04 वर्ष हैं.
