सागर। सागर जिले के बीना थाना क्षेत्र अंतर्गत चौकी मंडी बामोरा क्षेत्र से सत्रह वर्ष पूर्व 10 वर्षीय नाबालिग बालिका के गुम होने पर परिजन की रिपोर्ट पर गुम इंसान कायम किया गया था। बाद में उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार गुमशुदा नाबालिगों के प्रकरण में अपराध दर्ज किए जाने के निर्देश के पालन में थाना बीना में धारा 363 IPC पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। 2008 में यह बच्ची किसी तरह ट्रेन में बैठकर अहमदाबाद पहुंच गई, जहाँ कुछ सामाजिक संवेदनशील लोगों को वह मिली, जिन्होंने वर्षो तक उसे सुरक्षित रखकर पाला-पोसा और शिक्षा दी। बच्ची अपने नाना-नानी (भोपाल) का स्थान बता पाती थी, इसलिए वे लोग उसे भोपाल भी लेकर पहुँचे, परंतु सटीक पता न मिलने के कारण परिवार का मिलान नहीं हो पाया।कई वर्षों बाद, अब बालिग हो चुकी बालिका ने इंस्टाग्राम पर रील देखते समय एक वीडियो में मंडीबामोरा रेलवे स्टेशन का बोर्ड देखा, जिसे देखकर उसकी पुरानी यादें ताज़ा हो गईं। उसने यह बात अपने पति को बताई और दोनों ने मंडीबामोरा पुलिस चौकी से संपर्क किया। चौकी प्रभारी एवं स्टाफ ने इस संवेदनशील मामले को अत्यधिक गंभीरता से लेते हुए बच्ची और उसके पति को मंडीबामोरा बुलाया व परिवार की खोज कर उन्हें चौकी पर बुलाया। इस दौरान बच्ची अपने माता-पिता को पहचान नहीं पाई, किंतु पिता ने बेटी को देखते ही उसके माथे पर पुराने चोट के निशान के आधार पर पहचान लिया।
