खास से आम होने में भी होती है चर्चा

विन्ध्य की डायरी

डॉ रवि तिवारी

सच ही कहा गया है कि आम अगर आम रहेंगे तो उसकी कोई पूछ नही होगी पर कहीं यदि कोई खास आम हो जाए तो उसकी चर्चा भी आम हो जाती है. कुछ ऐसा ही वाक्या सीधी जिले के कलेक्ट्रोरेट में देखने को मिला जब सांसद पुत्र डा. अनूप मिश्रा और पुत्रवधू ने अपने व्यक्तिगत काम के लिए खास होते हुए भी आम होने की कोशिश की पर यहाँ भी उन्हें आम की तरह मिला सिर्फ आश्वासन. एक बात तो माननी पड़ेगी की प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी फिलहाल आम और खास में कोई भेदभाव नहीं करती है. तारीख पर तारीख का डायलॉग भले पुराना हो गया हो पर तरक्की के इस दौर में अभी भी उसका महत्व बरकरार है.

आम आदमी के जीवन का यह भटकाव कब और कैसे खत्म होगा यह यक्षप्रश्न हो गया है . अभी तक लोग बहुत कुछ भगवान के भरोसे छोडक़र बैठ जाते थे. अब उनकी पुकार लगता है इको सिस्टम में आए परिवर्तन के कारण वहाँ तक भी नही पहुँच पा रही हैं. अब देखना यही है कि सांसद पुत्र को मिली तारीख पर सुनवाई होती है या नही, अगर हो गयी तो जनसुनवाई का महत्व भी कई गुना बढ़ जाएगा. अमृतकाल में सुशासन का गुणगान करने वालो को भी यह सोचना होगा कि जब खास की यह हालत है तो आम आदमी की चप्पल कितनी घिस चुकी होगी ?

फिर स्थगित हुआ मुख्यमंत्री का दौरा

प्रदेश के मुखिया डा. मोहन यादव का सीधी जिले के बहरी दौरा एक बार फिर स्थगित हो गया है. यह बात और है कि व्यवस्था में लाखो रूपये पानी के तरह बहा दिये गये. दो बार मुख्यमंत्री का आगमन स्थगित होने से हुए लाखो के व्यय को लेकर व्यवस्था से जुड़े विभाग के अधिकारियों को खर्च एडजस्टमेंट की बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. देर रात अचानक मुख्यमंत्री कार्यालय से कार्यक्रम स्थगित होने की सूचना दी गई. सवाल यह उठता है कि आखिर मुख्यमंत्री का कार्यक्रम अचानक दूसरी बार फिर से स्थगित क्यो हो गया? तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे है . बहरहाल कार्यक्रम स्थगित को लेकर विपक्ष भी चुटकी ले रहा है.

मुख्यालय में धूल खा रही सूची

कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने संगठन सृजन अभियान की नई सकारात्मक शुरूआत के साथ मंथन से जिला अध्यक्ष निकले और जिला के साथ शहर की कार्यकारिणी में नए चेहरो को शामिल करने के साथ अध्यक्ष अपने मन पसंद चहेतो को भी कार्यकारिणी में स्थान दिया. इतना ही नही छत्रपो की पसंद न पसंद को भी ध्यान में रखते हुए रीवा कार्यकारिणी की सूची भोपाल में अटकी हुई है. पिछले कई दिनो से मुख्यालय में सूची धूल खा रही है. कई नेताओं को कुछ नामो पर आपत्ति है, फिलहाल सूची में नाम जोडऩे काटने का क्रम चल रहा है ताकि गुटबाजी को हवा न मिले. कांग्रेस की गुटबाजी जग जाहिर है, यहां नेता एक दूसरे की टांग खीचने और नीचा दिखाने की परम्परा का बखूबी पालन कर रहे है.

सुमंगल का अमंगल
पर्यावरण की सुरक्षा एवं स्वयं की स्वास्थ्य रक्षा के उद्देश्य से सप्ताह में मंगलवार के दिन सुमंगल साइकल दिवस अभियान की पूरे तामझाम के साथ शुरूआत की गई जो अब दिखावे तक सीमित रह गया है. साइकल से कार्यालय पहुंचने का संकल्प अकेले संभागायुक्त निभा रहे है. अन्य विभागो के अधिकारी अब सरकारी वाहनो से ही कार्यालय पहुंच रहे है. संभागायुक्त के आवाहन पर अफसरो ने हर मंगलवार को साइकल से कार्यालय आने का संकल्प लिया था पर अब साइकल अभियान पंक्चर हो चुका है. कुछ अधिकारी फोटो खिचवाने के लिये कार्यालय के पास ई-रिक्शा पर सवार हो जाते थे या फिर पैदल पहुंचते थे. फिलहाल अब यह भी बंद हो चुका है.

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