कानून के रखवालों पर दाग

मध्य क्षेत्र की डायरी

दिलीप झा

सरकार ने विधानसभा सत्र के दौरान जो जानकारी दी है वह प्रदेश के लिए शर्मसार करने वाली बात है। अगर कानून के रखवालों पर दो वर्ष के अंदर 329 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज हुई हैं तो स्पष्ट है कि सरकार ने बेहतर पुलिसिंग नीति को अमलीजामा पहनाया है लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कुछ भ्रष्ट पुलिस कर्मियों के कारण पूरे सिस्टम ने लोगों में अपना भरोसा खोया है।

भ्रष्टाचार में लिप्त 259 पुलिसकर्मियों पर चालानी कार्यवाही और 61 के खिलाफ जांच जारी है। वहीं, 7 एफआईआर निरस्त हुई और दो पर स्टे मिला हुआ है। इनमें सबसे ज्यादा भोपाल शहर में 48 पुलिसवालों पर मुकदमे दर्ज हैं। इसके बाद ग्वालियर में 27, इंदौर सिटी और देहात में 17 पुलिसकर्मियों मुकदमे दर्ज हैं। यह जानकारी खुद मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक बाला बच्चन के प्रश्नों के जवाब में दी है।

सरकार भलीभांति जानती है कि पुलिस तंत्र को मजबूत किये बिना आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण कतई संभव नहीं है क्योंकि यहां दशकों से यहां बड़ा षडयंत्र चल रहा है कि शांत प्रदेश को अशांत कैसे बनाया जाए। ख़ासतौर पर एमपी के खंडवा और बुरहानपुर जिलों में आतंकी संगठन सक्रिय हैं और यही से वे पूरे राज्य में असामाजिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। ये असामाजिक तत्व प्रदेश में अशांति का वातावरण तैयार करना चाहते हैं ताकि सरकार को बदनाम किया जा सके।‌ सूत्रों का कहना है कि पुलिस के कुछ लोगों का आपराधिक गतिविधियों में शामिल तत्वों के साथ संलिप्तता होने के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

इसकी गहनता से जांच होनी चाहिए। सरकार के मंत्री भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि कानून व्यवस्था सुचारू नहीं है तो जाहिर है विपक्ष इस मसले पर सरकार के खिलाफ हमलावर है।‌ अपराधी जनता से पैसे लूटकर सरकार के खिलाफ अभियान चला रहे हैं और हमारा सिस्टम कुछ नहीं कर पा रहा है तो यह सरकार के लिए घोर चिंता का विषय होना चाहिए। जांच एजेंसियों को चुस्त-दुरुस्त रखना चाहिए ताकि सही सूचनाएं मिल सके। सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था के लिए कटिबद्ध बीजेपी सरकार को आम जनता की नजरों में गिराने का बड़ा खेल चल रहा है। इसलिए जिन पुलिस कर्मियों के खिलाफ विवेचना चल रही है उसकी रिपोर्ट जल्द आनी चाहिए ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

रुक नहीं रही लूट और हत्या

28 नवंबर को इंदौर के महूं में दस लाख की लूट और एक सप्ताह के भीतर अशोकनगर शहर में 3 दिसंबर को 20 लाख की लूट एवं 4 दिसंबर को श्योपुर में किसान की आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर 5 लाख की लूट जैसी घटनाओं से प्रदेश में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि जनता की सुरक्षा पुलिस का दायित्व है। लोग कहते हैं पुलिस की लचर और लुंज-पुंज कार्यप्रणाली की वजह से बदमाशों के हौसले बुलंद हैं।

जबतक ऐसे अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी अपराधी जनता की गाढ़ी कमाई लूटते ही रहेंगे। इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि पुलिस का खौफ खत्म होना किसी भी प्रदेश के लिए घातक माना जाता है। इससे लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह से बिगड़ने की नौबत आ जाती है।अशोकनगर में बदमाशों ने बाइक अड़ाकर गल्ला व्यापारी को रोका और कट्टे की नोंक पर डिग्गी तोड़ कर 20 लाख रुपये लूट लिया। गल्ला व्यापारी के विरोध करने पर बदमाशों ने कट्टे की बट से उनके सिर पर हमला किया। डराने के लिए हवाई फायर भी किया। लेकिन हैरानी की बात है कि अशोकनगर पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। पुलिस की रवैया क्यों नहीं सुधर रही है, यह समझ से परे है।

किसका मोहरा है आईएएस संतोष वर्मा

आईएएस संतोष वर्मा की बदजुबानी से सरकार की बहुत किरकिरी हुई है। प्रदेश के दो सांसद जनार्दन मिश्र और आलोक शर्मा ने ब्राह्मण की बेटियों को लेकर असभ्य टिप्पणी करने वाले आईएएस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।‌ उन्होंने यह भी मांग की है कि इसकी जांच होनी चाहिए कि किसके कहने पर वर्मा ने ऐसा बयान दिया। यह किसका मोहरा है। क्योंकि किसी वर्ग या समुदाय पर जातिगत टिप्पणी कर सामाजिक समरसता और सौहार्द को बिगाड़ना कानूनी जूर्म है। जबकि राज्य सरकार ने आईएएस संतोष वर्मा को नोटिस देकर सात दिन में जवाब मांगा है।

इस बीच, भोपाल के सांसद आलोक शर्मा ने बुधवार को पीएमओ में राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर आईएएस संतोष वर्मा को बर्खास्त करने की मांग की है। डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने सांसद आलोक शर्मा को आश्वस्त किया है कि जांच के बाद समुचित कार्रवाई की जाएगी। इस बीच पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने सरकार से मांग की है कि बदजुबान आईएएस वर्मा के ऊपर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और उसे तत्काल बर्खास्त किया जाए। कांग्रेस नेता और ब्राह्मण समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रिका द्विवेदी ने मोहन यादव सरकार से संतोष वर्मा को बर्खास्त करने की मांग की ताकि सामाजिक समरसता को बिगाड़ने वालों को सबक मिल सके।‌ वहीं, गुरुवार को वर्मा ने सरकार द्वारा भेजे गए कारण बताओ नोटिस के जवाब में कहा कि उसके भाषण के एक अंश को दिखाया गया है।

बिहार विधानसभा में उठा आईएएस वर्मा का मामला

अपनी बदजुबानी के कारण आईएएस संतोष वर्मा पूरी तरह से घिर गए हैं। बिहार विधानसभा में भी वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग उठी।‌ लोजपा ( रामविलास) के विधायक राजू तिवारी ने सरकार से कहा कि भोपाल के आईएएस संतोष वर्मा ने मर्यादा को दरकिनार कर ब्राह्मण की बेटियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है, यह शर्मनाक है। इसलिए ऐसे अधिकारी पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की हम सरकार से मांग करते हैं।

Next Post

पत्नी की हत्या कर फरार हुआ आरोपी गिरफ्तार

Tue Dec 9 , 2025
इंदौर:बेटमा थाना क्षेत्र में पत्नी की कुल्हाड़ी मारकर हत्या कर भागे एक आरोपी को पुलिस ने कुछ ही घंटों में भोपाल से गिरफ्तार कर लिया. आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा निर्देशन पर पुलिस ने दो टीमों को लगाया था. पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही […]

You May Like