जबलपुर: कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश विजय सिंह कावछा की अदालत ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया कि हिंदू पति का मुस्लिम पत्नी से विवाह प्रावधान अनुसार पहले से ही शून्य है, अत: शून्यीकरण का आवेदन निरस्त किया जाता है। आवेदक अरमान श्रीवास्तव ने शाहीन बेगम से विवाह किया था। विवाह के बाद विवाद की स्थिति निर्मित होने पर अदालत चला आया।
उसने हिंदू विवाह अधिनियम-1955 की धारा-पांच के अंतर्गत विवाह शून्यीकरण का आदेश पारित करने की मांग की गई थी। दोनों का संपर्क इंटरनेट वेबसाइट पर हुआ था। जिसके बाद मुलाकात हुई और मंदिर में विवाह कर लिया। आवेदक हिंदु धर्म को मानता है, जबकि उसकी पत्नी मुस्लिम धर्म की है। आवेदक की ओर से विवाह शून्यीकरण की मांग इसलिए अस्वीकार करने योग्य है, क्योंकि हिंदु विवाह अधिनियम-1955 की आवश्यक शर्तें पूरी न करने के कारण विवाह दिनांक से ही शून्य है। जिसके बाद अदालत ने उक्त निर्देश दिये।
