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भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए स्वास्थ्य विभाग, सरकारी स्कूलों और मुफ्त लैपटॉप वितरण योजना में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया।
पूर्व मंत्री और राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की पैथोलॉजी सेवाओं में 943 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि विभाग ने विधानसभा में 68 हजार पन्नों का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया है, जिसके प्रारंभिक अध्ययन में चौंकाने वाली विसंगतियाँ सामने आई हैं—जैसे 7 करोड़ की आबादी पर 12.84 करोड़ जांचें दिखाना, फर्जी बिल तैयार करना, और PHC, CHC तथा ब्लॉक अस्पतालों में जमीन पर जांच किए बिना रिपोर्टें बनाना।
सिंह ने आगे कहा कि एक ही व्यक्ति की दो कंपनियों को अलग-अलग नाम से टेंडर दिए गए, एक ही जांच के अलग-अलग रेट लगाए गए और जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं पर 0% GST लागू है, वहाँ 18% GST वसूला गया। उन्होंने बताया कि जिस कंपनी पर ED और इनकम टैक्स की कार्रवाई हो चुकी है, उसे जुलाई 2025 में सरकार ने एक वर्ष का एक्सटेंशन भी दे दिया। इसे उन्होंने “मध्यप्रदेश की जनता के स्वास्थ्य के साथ किया गया अपराध” बताते हुए CBI जांच की मांग की।
विधायक देवेंद्र पटेल ने रायसेन जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों के अधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में छोटे बच्चों से झाड़ू लगवाने और सफाई करवाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। कई विद्यालय सप्ताह में 3–4 दिन बंद रहते हैं और शिक्षक नियमित रूप से अनुपस्थित पाए गए। ये सभी प्रकरण RTE एक्ट 2009, स्कूल शिक्षा विभाग, SCERT, DIOS और मध्याह्न भोजन योजना के नियमों का खुला उल्लंघन हैं। उन्होंने बताया कि मामले की शिकायत उन्होंने NCPCR, NHRC और अन्य उच्च अधिकारियों को भेज दी है तथा दोषी शिक्षकों और अधिकारियों के तत्काल निलंबन और जिलेभर में जांच की मांग की है।
विधायक ऋषि अग्रवाल ने मुफ्त लैपटॉप वितरण योजना में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गुना के फतेहगढ़ संदीपनी विद्यालय में 34 छात्रों के नाम से फर्जी खाते बनाए गए और राशि अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई। एक मामले में शिवपुरी की एक छात्रा की राशि बिहार के खाते में चली गई।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रवक्ता विराज यादव ने चेतावनी दी कि यदि 30 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो NSUI छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्यव्यापी उग्र आंदोलन शुरू करेगी।
