मरीज की खाँसी में एक लीटर खून — पल्मोनोलॉजी और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी टीम ने बचाई मरीज की जान

ग्वालियर: बीआईएमआर हॉस्पिटल में हाल ही में एक 30 वर्षीय महिला मरीज उपचार के लिए लाई गई जो पुरानी फेफड़ों की टीबी और फेफड़े में बनी कैविटी से पीड़ित थी, उसे अचानक तेज खांसी के साथ भारी मात्रा में खून आने की गंभीर समस्या थी। स्थिति अत्यंत गंभीर होने पर कई चिकित्सकों ने मरीज को इलाज के लिए दिल्ली रेफर करने की सलाह दी थी लेकिन मरीज को बीआईएमआर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शेरू सिंह राजपूत द्वारा तत्काल भर्ती किया गया, जहाँ इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी टीम ने तत्काल इलाज शुरू किया।

डॉ. राधेश्याम मीणा, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट ने बिना किसी सर्जरी या चीरे के, आधुनिक ब्रॉन्कियल आर्टरी एम्बोलाइजेशन तकनीक द्वारा मरीज का उपचार किया। इस अधुनातन प्रक्रिया के दौरान खून बहा रही धमनी की पहचान कर उसे ब्लॉक किया गया, जिससे रक्तस्राव तुरंत रुक गया।

इस उपचार की खास विशेषता यह रही कि इलाज की प्रक्रिया में एक भी चीरा नहीं लगाया गया, मरीज को ब्लड ट्रांसफ्यूज़न की आवश्यकता नहीं पड़ी, और वह अगले ही दिन सामान्य रूप से चल-फिरने लगी। बीएई एक अत्याधुनिक, जान बचाने वाली इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी तकनीक है जो विशेष रूप से पुरानी टीबी, फेफड़ों की कैविटी, ब्रोंकिइक्टेसिस और फेफड़ों के कैंसर में होने वाले रक्तस्राव को रोकने में अत्यधिक प्रभावी मानी जाती है।

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