चेन्नई, 29 नवंबर (वार्ता) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने शनिवार को केंद्र सरकार पर तमिलनाडु की वैध मांगों को अनसुना करके ‘भेदभाव और विश्वासघात’ करने का आरोप लगाया।
उन्होंने इसे देश के सबसे बड़े लोकतंत्र के दावे के विपरीत बताया और कहा कि केंद्र को संसद के शीतकालीन सत्र में जवाब देना होगा।
इससे पहले, स्टालिन की अध्यक्षता में हुई द्रमुक सांसदों की बैठक में शीतकालीन सत्र में उठाने के लिए कई प्रस्ताव पारित किए गए। इसमें जीएसटी राजस्व बँटवारे, केंद्रीय पूल से आवंटन और केंद्र प्रायोजित योजनाओं का बोझ राज्यों पर डालने के लिए मोदी सरकार की आलोचना की गई। इसके अलावा प्रधानमंत्री से कोयम्बटूर और मदुरै के लिए मेट्रो रेल परियोजनाओं को मंजूरी देने की मांग की गई, साथ ही रेलवे परियोजनाओं के प्रति सौतेले व्यवहार की निंदा की गई।
बैठक में सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के लिए 3548.22 करोड़ रुपये और मनरेगा के तहत लंबित बकाया राशि तुरंत जारी करने की मांग की गई। साथ ही राज्यपाल कार्यालय के दुरुपयोग, शिक्षा के भगवाकरण को रोकने और पाक जलडमरूमध्य में मछुआरों के पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए श्रीलंका से बात करने की मांग की गई।
