प्रवेश कुमार मिश्र
नई दिल्ली.
बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के कारण व कारकों को ढूंढने में जुटे कांग्रेसी रणनीतिकारों ने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं व पार्टी के 61 उम्मीदवारों की मौजूदगी में समीक्षा बैठक की है.सूत्रों की मानें तो पार्टी के केन्द्रीय वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में आरंभ हुई बैठक का एजेंडा पहले से ही तय कर दिया गया था. सभी उम्मीदवारों को अपने शब्दों में हार के प्रमुख कारणों का विवरण देने को कहा गया था. इतना ही नहीं जिम्मेदार प्रभारी सचिवों को भी एक रिपोर्ट देने को कहा गया था. प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक दल के नेता से भी उम्मीदवार चयन प्रक्रिया से लेकर प्रचार अभियान तक के बिंदुवार व विस्तृत जानकारी मांगी गई थी.
यानी पार्टी रणनीतिकार किसी भी परिणाम पर पहुंचने के पहले बहुपक्षीय रिपोर्ट को प्राप्त करना चाहते हैं. सूत्रों की मानें तो इस बैठक में वरिष्ठ नेता तारिक अनवर, अखिलेश प्रसाद सिंह व निर्दलीय सांसद पप्पू यादव से भी हार के प्रमुख कारणों पर विमर्श किया गया है. उम्मीदवारों के घोषणा के बाद जिस तरह से तारिक अनवर ने प्रदेश संगठन, प्रभारी महासचिव कृष्णा अल्लावरू, तीनों प्रभारी सचिवों व वार रूम प्रभारी के निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्हें कठघरे में खड़ा किया था, उस संदर्भ में भी उनसे रिपोर्ट मांगी गई. इसके अलावा कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा पार्टी पदाधिकारियों पर टिकट बेचने के आरोपों के संदर्भ में भी व्यक्तिगत चर्चा की गई है.
हालांकि इस बैठक में शामिल एक वरिष्ठ नेता की मानें तो समीक्षा की प्रक्रिया सिर्फ खानापूर्ति जैसा प्रतीत हो रही थी. उनका कहना है कि जिन पर आरोप है उनसे ही रिपोर्ट ली जाएगी तो सच्चाई कैसे सामने आएगी? जो उम्मीदवार ऐन केन प्रकारेण यानी किसी भी तरह से उम्मीदवारी पाने में सफल रहे हैं वे कैसे अपने ही चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाएंगे? ऐसे में कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी रणनीतिकारों के सामने उम्मीदवार चयन की आरंभिक प्रक्रिया से लेकर अंत तक की पारदर्शी रिपोर्ट प्रभारी महासचिव व प्रदेश अध्यक्ष से मांगने का सुझाव दिया है. इसके अलावा समीक्षा की अगली कड़ी में नाराज पक्ष से भी बात करने और उनके द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले तथ्यात्मक साक्ष्यों पर भी विचार करने का सुझाव दिया गया है.
सूत्रों की मानें तो आरंभिक बैठक में कुछ नेताओं द्वारा यह प्रयास किया गया कि हार का ठीकरा चुनाव के समय सरकार द्वारा महिला मतदाताओं को दस हजार रूपए दिए जाने, ईवीएम में गड़बड़ी, अंकगणितिय फार्मूला, अंत समय तक राजद व सहयोगी दलों के साथ गठबंधन की अनिश्चितता, गठबंधन के प्रचार अभियान में एकजुटता का अभाव पर फोड़ा जाए. लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा उक्त तर्कों के सहारे सुनियोजित तरीके से जिम्मेदार लोगों द्वारा आरोप मुक्त होने के प्रयास पर सीधे तौर पर सवाल खड़े किए गए जिसके बाद भविष्य में कुछ और बैठक करने की बात के साथ सभी 61 उम्मीदवारों को बुथस्तरीय रिपोर्ट तैयार कर जल्द से जल्द सौंपने का निर्देश दिया गया है
