शिवपुरी: बागेश्वर बाबा पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने आज गुरुवार को यहां श्रीमद् भागवत कथा शुरू होने से पहले पत्रकारों से ‘चाय पर चर्चा’ की। इस मुलाकात में उन्होंने राजनीति, आतंकवाद और जंनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर बात की।पत्रकारों से बात करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि देश को गजवा‑ए‑हिंद जैसे विचारों के हवाले नहीं होने देंगे। हम इस देश को गजवा‑ए‑हिंद नहीं बनने देंगे। हमें इसे भगवा हिंद बनाना है। इसके लिए हमें संसद में जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने खुद के राजनीति में आने के चर्चाओं पर विराम लगाते हुए पदयात्रा निकालने को राजनीति का रास्ता मानने के सवाल पर कहा कि न हम राजनीति में जाने के लिए निकले हैं, न पार्टी बनानी है, न किसी पार्टी का समर्थन करना है। यह पदयात्रा केवल हिंदू एकता और सनातन एकता के लिए है। राजनीति में जाने के कई रास्ते हैं, इसके लिए पदयात्रा की जरूरत नहीं है। पंडित शास्त्री ने स्कूलों के पाठ्यक्रम में गीता‑भागवत‑रामायण को जोड़ने की वकालत की।
उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में ऐसे ग्रंथ शामिल होने चाहिए जो युवाओं को सही दिशा दें। अगर गीता, भागवत और रामायण को जोड़ दिया जाए तो युवा सही दिशा पाएंगे। कई पुस्तकें ऐसी हैं जो केवल अपने मजहब के लोगों को इंसान मानती हैं और बाकी को काफिर कहती हैं। सनातन धर्म ऐसा नहीं है, यह वसुधैव कुटुंबकम की बात करता है। इसलिए पाठ्यक्रम में ‘जोड़ने वाले’ जोड़ें, ‘तोड़ने वाले’ नहीं।
दिल्ली में आत्मघाती हमलों में मारे गए आतंकियों के परिवारों पर शास्त्री ने कहा कि इस्लाम धर्म मानने वाले अपने बच्चों की शिक्षा और तालीम पर ध्यान दें। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि अपने बच्चों को अब्दुल कलाम बनाएं, आतंकवादी नहीं। जो ऐसा नहीं करना चाहते, वे लाहौर जा सकते हैं। दिल्ली धमाके के आरोपी डॉक्टर के आतंकी निकले पर उन्होंने कहा कि यह आतंकी संगठनों की बौखलाहट है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश का खाना खाते हैं और तिरंगे में चांद ढूंढते हैं, जबकि हम चांद पर तिरंगा देखना चाहते हैं।शास्त्री ने हिंदू की घटती जनसंख्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हिंन्दुओं को चार बच्चे पैदा करने चाहिए। संख्या संख्या बढ़ेगी तभी खेल बनेगा। चच्चे के 30 बच्चे हो सकते हैं तो हिंदुओं के चार क्यों नहीं?
