इंदौर: भविष्य की जरूरतों की अनदेखी कर विकास परियोजनाओं के नाम पर बार-बार पैसा बहाया जाता है. बीआरटीएस प्रोजेक्ट इसी तरह की अपर्याप्त योजना का एक उदाहरण माना जा सकता है. हालांकि बीआरटीएस हटने के बाद शहर की जीवन रेखा माने जाने वाला एबी मार्ग अब सुंदर और आकर्षक लग रहा है. कोई भी बड़े बुनियादी ढांचे वाली परियोजना शुरू करते समय लंबी अवधि की योजना और जनता के पैसे का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
कुछ वर्ष पूर्व ही करोड़ों खर्च कर निरंजनपुर चौराहा से राजीव गांधी चौराहा तक बीआरटीएस बनाया गया था, जिसके लिए शहर की जीवन रेखा माने जाने वाले एबी रोड का काफी हिस्सा लिया गया था. इससे कुछ सुविधा तो हुई, लेकिन यातायात में बड़ी बाधाएं उत्पन्न होने लगीं. अब इसे हटाने की कवायद चल रही है. बीआरटीएस की रेलिंग को हटाने का कार्य हो रहा है, वहीं आई बस स्टॉप को भी हटाया जा रहा है.
नवलखा, इंदिरा चौराहा और शिवाजी प्रतिमा चौराहा पर तेजी से कार्य चल रहा है, वहीं जीपीओ चौराहा से शिवाजी प्रतिमा की ओर जाने वाले मार्ग से पूरी तरह से रेलिंग हटा दी गई है और डिवाईडर लगा दिए गए हैं. इससे सडक¸ का आकार बहुत ही बड़ा और खुला दिखाई दे रहा है. साथ ही मार्ग की खुबसूरती में निखार आ गया है. शाम चार बजे से जीपीओ सिंगनल पर लंबी कतारें लग जाती थीं, अब एक घंटे निगरानी करने पर भी यातायात सुगम दिखाई दिया. पूरी तरह से रेलिंग हटने पर जो सुविधा होगी, वह तो ठीक है, लेकिन देखना होगा कि अब आगे नगर निगम के जिम्मेदार जनता का पैसा बर्बाद करने के लिए कमरे में बैठकर योजना बनाते हैं या भविष्य को देखकर विकास और उन्नति की ओर बढ़ेंगे.
यह बोले नागरिक
यातायात की समस्या है तो अब बीआरटीएस को कॉमन वे कर देना चाहिए हालांकि, यह निर्णय हो चुका है, फिर भी कई बार उससें गुजरने वाले वाहनों से यातायात पुलिस द्वारा चालान बनाकर जबरन वसूली की जाती है, जो गलत है.
-अजय शर्मा
जनसंख्या के साथ ही सडक¸ों पर वाहन की संख्या भी रोज बढ़ रही है. इसलिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार को इसी मार्ग पर अंडर पास और ओवर ब्रिज निर्माण करना चाहिए, इससे समस्याएं दूर और सफर आसान होगा.
– प्रकाश कुवाल
यह शहर का ऐसा मार्ग है, जो शहर के मध्य से गुजरता है और शहर को दो हिस्सों को जोड़ता है. इस पर तो मेट्रो ट्रेन संचालित करनी चाहिए. ऐसा करने से यह मार्ग आम लोगों के लिए ट्रांसपोर्ट का बड़ा आयाम रहेगा.
– नदीम खान
