नया लेबर कोड मज़दूरों को असुरक्षा के दौर में धकेल देगा

भोपाल: केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए लेबर कोड को लेकर आल डिपार्टमेंट आउटसोर्स अस्थायी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा, मध्यप्रदेश ने गंभीर चिंता जताई है। मोर्चा का आरोप है कि ये कोड दशकों के मज़दूर संघर्ष से हासिल किए गए अधिकारों को कमजोर कर देंगे और देश के श्रमिकों के लिए असुरक्षा का नया युग वैध कर देंगे।

 

संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर बनाए गए चार लेबर कोड का उद्देश्य “Ease of Doing Business” नहीं, बल्कि मज़दूरों को अस्थिरता और शोषण की ओर ढकेलना है। “ये कोड ‘हायर एंड फायर’ व्यवस्था को कानूनी रूप देते हैं और मज़दूरों के मूल अधिकारों पर सीधा हमला हैं,” उन्होंने कहा।

 

मोर्चा के अनुसार, नए कोड नौकरी की सुरक्षा को कमजोर करते हैं, ट्रेड यूनियनों की ताकत घटाते हैं और सामूहिक सौदेबाज़ी को बेहद कठिन बना देते हैं। शांतिपूर्ण हड़ताल पर भी कड़ी पाबंदियां लगने से श्रमिक आंदोलन “लगभग असंभव” हो जाएगा।

 

फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट का वैधीकरण

शर्मा ने बताया कि स्थायी नौकरियों की जगह अब फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट ले रहे हैं, जिससे कंपनियां अल्पकालिक अवधि के लिए कर्मचारी रख सकती हैं और अनुबंध पूरा होते ही निकाल सकती हैं। यह व्यवस्था ठेका प्रथा को और मजबूत कर रही है तथा विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र में असंगठित कामगारों की संख्या तेजी से बढ़ा रही है। विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार 12.9% से घटकर 12.1% रह गया है, जबकि ठेका मज़दूरों का हिस्सा 15.5% से बढ़कर 27.9% हो गया है।

 

फिक्स्ड टर्म कर्मचारी स्थायी कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन पाते हैं, उन्हें छंटनी पर मुआवज़ा नहीं मिलता और अनुबंध समाप्त होते ही वे बेरोज़गार हो जाते हैं।

 

सामाजिक सुरक्षा में गंभीर कमी

मोर्चा ने बताया कि छंटनी के लिए सरकारी अनुमति की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारियों तक कर दी गई है, जिससे कंपनियों को कर्मचारियों को हटाने में अधिक स्वतंत्रता मिल गई है। देश की 610 मिलियन श्रम शक्ति में से 93% मज़दूर—जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं—लेबर कोड के दायरे से बाहर रहेंगे।

 

गिग वर्कर्स, घरेलू कामगार और छोटे प्रतिष्ठानों के कर्मचारी भी सुरक्षा से वंचित रहेंगे। मोर्चा ने पीएफ, ग्रेच्युटी और ठेकेदार द्वारा अंशदान न देने पर मुख्य नियोक्ता की जवाबदेही को कमजोर करने वाली प्रावधानों की भी आलोचना की।

संयुक्त मोर्चा ने नए लेबर कोड को “मज़दूर-विरोधी” बताते हुए केंद्र सरकार से इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की है।

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