
भोपाल। रवींद्र भवन में शुक्रवार शाम सुरुचि प्रकाशन द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ मनमोहन वैद्य की पुस्तक हम और यह विश्व का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में भारतीय चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और आत्मगौरव पर विस्तृत चर्चा हुई।इस अवसर पर आनंदम धाम आश्रम, वृंदावन के पीठाधीश्वर ऋतेश्वर महाराज, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली और लेखक डॉ. मनमोहन वैद्य और विष्णु त्रिपाठी ने अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम का शुभारंभ 5 बजकर 7 मिनट पर दीप प्रज्वलन के बाद किया गया। कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि यह पुस्तक भारत के गौरवपूर्ण इतिहास और भविष्य की दिशा दोनों को समझने का अवसर देती है। उन्होंने इसे आठ वर्षों के अनुभवों का सार बताया और कहा कि यह पुस्तक सोए हुए को जगा देने की क्षमता रखती है। उन्होंने आज के भारत को आत्मविश्वासी और विश्व मंच पर मजबूत उपस्थिति वाला बताया।
पुस्तक के लेखक डॉ वैद्य ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को समझने के लिए पहले भारत को मानना और फिर जानना आवश्यक है तभी भारत के निर्माण की दिशा मजबूत हो सकती है। इस पुस्तक में भारत की संस्कृति,भारत का अतीत, समृद्धि और विरासत के साथ गौरवपूर्ण इतिहास की झलक शामिल की गई है। उन्होंने बताया कि संघ पर अनावश्यक विरोध कई बार उसकी स्वीकार्यता बढ़ा देता है। जॉइन आरएसएस वेबसाइट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक ही माह में हजारों लोगों ने स्वयंसेवक बनने का अनुरोध किया जो सामाजिक परिवर्तन की दिशा का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की संस्कृति एक है जो विविध रूपों में प्रकट होती है और समाज आधारित दायित्व ही भारतीय परंपरा की मूलधारा है। कार्यक्रम में सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने संस्था की प्रकाशन यात्रा और भविष्य के बौद्धिक विमर्शों की जानकारी दी। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य नागरिक, साहित्यकार और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। संचालन डॉ साधना बलवटे ने किया और कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् के साथ हुआ।
