इंदौर. कथित 200 करोड़ रुपए के वित्तीय घोटाले की जांच में ईओडब्ल्यू ने आस्था फाउंडेशन के दफ्तर से बरामद डिजिटल सामग्री की गहन स्कैनिंग शुरू कर दी है. शुरुआती पड़ताल में कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं, जबकि इसी मामले में एलएनसीटी समूह के शीर्ष पदाधिकारियों पर पहले ही गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज हो चुकी है.
कनाड़िया रोड स्थित सेवाकुंज अस्पताल परिसर में संचालित आस्था फाउंडेशन फॉर एजुकेशन सोसायटी पर हुई तलाशी कार्रवाई के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ अब जब्त रिकॉर्ड का विस्तृत विश्लेषण कर रहा है.
टीम ने दफ्तर से हार्ड डिस्क, पेनड्राइव, बैलेंस शीट, बैंक स्टेटमेंट और लोन से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लिए थे. अब इन सभी की डिजिटल फोरेंसिक और वित्तीय जांच शुरू हो चुकी है.
सूत्रों के अनुसार शुरुआती स्कैन में ऐसे कई लेन-देन मिले हैं जिनमें संस्था के नाम पर लिए गए बड़े लोन की राशि आगे निजी संस्थाओं, संबंधित ट्रस्टों और थर्ड-पार्टी खातों में स्थानांतरित होने के संकेत हैं. जांच अधिकारी इसे पूरे कथित घोटाले की वित्तीय संरचना समझने के लिए ‘सबसे अहम लिंक’ मान रहे हैं. तकनीकी टीम डिलीट किए गए डेटा की रिकवरी भी कर रही है, ताकि किसी भी संभावित मिटाई गई फाइल का विश्लेषण किया जा सके. यह पूरा मामला संस्था के पूर्व अध्यक्ष अनिल संघवी की शिकायत से शुरू हुआ था.
आरोप है कि सोसायटी के नाम पर लिए गए करोड़ों रुपए के लोन का उपयोग निर्धारित शैक्षणिक उद्देश्यों के बजाय निजी लाभ और अन्य संस्थाओं के देनदारियों के भुगतान में किया. तलाशी कार्रवाई के दौरान पत्रकारों और मीडिया टीमों को परिसर में प्रवेश न मिलने के कारण विवाद की स्थिति भी बनी रही. सुरक्षा कर्मियों और तैनात बाउंसर्स ने मीडिया को दफ्तर के बाहर ही रोक दिया था.
अधिकारियों का कहना है कि तलाशी के दौरान संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा और गोपनीयता को देखते हुए यह कदम उठाया. जांच टीम अब संदिग्ध ट्रांजेक्शन की टाइमलाइन तैयार कर रही है और सोसायटी से जुड़े बैंक खातों, निर्माण कार्यों, ठेकेदारी भुगतान तथा फाउंडेशन के वित्तीय अनुबंधों की अलग से समीक्षा कर रही है.
सूत्रों का कहना है कि जब्त सामग्री की फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई जैसे खातों पर प्रतिबंध, संपत्ति कुर्की या नए आरोपियों के नाम शामिल करना तेजी से आगे बढ़ सकती है.
