उज्जैन:मिट्टी की सौगंध खाकर जो किसान लैंड पूलिंग योजना के तहत अपनी जमीन नहीं देना चाहते थे, उन्हें मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एक बड़ी सौगात दे दी और स्थाई कुंभ सिटी के लिए बनाई जा रही है लैंड पूलिंग योजना निरस्त करते हुए किसानों के सम्मान में निर्णय लिया. ऐसे में किसान अंगारेश्वर मन्दिर क्षेत्र से मिट्टी लेकर सरकार के प्रति आभार रैली निकालने पहुंचे और सौगंध समन्वय में बदल गई.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में मंगलवार को भारतीय किसान संघ ने एक विशाल आभार रैली निकालकर दिवाली और होली एक साथ मनाई. यह जश्न मुख्यमंत्री द्वारा सिंहस्थ-2028 के लिए प्रस्तावित लैंड पूलिंग योजना को वापस लेने के ऐतिहासिक निर्णय के बाद मनाया गया, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है.
भगवान बलराम के लगाए जयकारे
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर किसानों की मेहनत रंग लाई जैसे पोस्टर लगाए, किसान जिला प्रशासनिक भवन कोठी से टावर चौक तक रैली में शामिल हुए. इस दौरान किसानों ने जमकर आतिशबाजी की, रंग-गुलाल उड़ाया और भगवान बलराम के जयकारे लगाए. किसान अपने हाथों में हल लेकर आए, जो उनकी जीत और कृषि के प्रति अटूट लगाव का प्रतीक था.
क्या थी लैंड पूलिंग योजना
दरअसल, राज्य सरकार ने महाकुंभ सिंहस्थ 2028 के लिए एक स्थाई कुंभ सिटी बनाने की योजना तैयार की थी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत, किसानों की 50′ जमीन लैंड पूलिंग के माध्यम से अधिग्रहित की जा रही थी. किसान इस योजना से नाखुश थे और उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से कई बार मिलकर अपनी चिंता व्यक्त की, बावजूद संवादहीनता के चलते उनकी बात मुख्यमंत्री तक नहीं पहुँच पाई थी.
किसान संघ ने संभाला मोर्चा, दिल्ली तक पहुँची बात
जब स्थानीय स्तर पर किसानों की बात नहीं सुनी गई, तो भारतीय किसान संघ ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाया. संघ ने मोर्चा संभाला और संगठित विरोध के माध्यम से इस मुद्दे को दिल्ली तक पहुँचाया. इसके परिणामस्वरूप, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में एक बड़ा कदम उठाया. 17 नवंबर को भोपाल में मुख्यमंत्री ने भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना और अन्य पदाधिकारियों से विस्तृत चर्चा की.
केंद्र से भी मिला सहयोग
नवभारत से चर्चा में भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आज मैंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से भोपाल में भेंट हुई और केंद्र ने भी सेतु का काम किया. बातचीत के बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि लैंड पूलिंग योजना को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. इसके बाद, मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में भी लैंड पूलिंग योजना को निरस्त करने का प्रस्ताव लाया गया, जिस पर मुहर लग गई.
अब परंपरागत तरीके से होगा सिंहस्थ का विकास
मुख्यमंत्री के निर्णय के बाद अब सिंहस्थ 2028 का आयोजन और तैयारी परंपरागत तरीके से की जाएगी. सरकार अब वर्ष 2004 और 2016 के सिंहस्थ की तर्ज पर ही विकास कार्य करेगी, जिसका अर्थ है कि कच्चे क्षेत्र को ही विकसित किया जाएगा. इससे पहले, सरकार सड़क, पानी, और बिजली जैसी व्यवस्थाओं के लिए पक्का स्ट्रख्र बनाने और धार्मिक संस्थाओं को बड़े निर्माण की अनुमति देने की योजना बना रही थी, जिसके लिए किसानों की जमीन लैंड पूलिंग के तहत जा रही थी.
आभार सभा में लाए मिट्टी
टॉवर चौक पर आयोजित आभार आमसभा में किसानों ने डॉ. मोहन यादव सरकार का हृदय से आभार जताया और इसे किसानों के हित में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय बताया. इस दौरान एक भावनात्मक पहल की गई—मंगलनाथ और अंगारेश्वर मंदिर की जमीन से मिट्टी लाकर किसानों को उसकी सौगंध दिलाई गई. किसानों ने शपथ ली कि यदि किसी ने भी भविष्य में लैंड पूलिंग योजना के तहत अपनी जमीन दी, तो समाज द्वारा उसका बहिष्कार किया जाएगा. पूरी सभा भगवान बलराम जी के जयकारों से गूँज उठी, जिसने किसानों की एकजुटता और जीत के संकल्प को दर्शाया. उक्त रैली में उज्जैन उत्तर के विधायक अनिल जैन कलुहेड़ा से लेकर कई भाजपा नेता कार्यकर्ता और भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी सदस्य माता बहनें उपस्थित हुई।
