भोपाल: बिट्टन मार्केट दशहरा मैदान में चल रहे केरला फेस्ट का तीसरा दिन रंग, संगीत और सांस्कृतिक उत्साह से भरपूर रहा। शनिवार को सप्ताहांत की भारी भीड़ ने केरल और मध्य प्रदेश की कला, संगीत और परंपराओं के अनूठे मेल का आनंद लिया। बल्कि कथकली से लेकर थेय्याम, फ्यूजन संगीत से लेकर लोकनृत्यों तक हर प्रस्तुति से दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़ गए। तीसरे दिन की प्रस्तुति ने उत्सव में भारत की सांस्कृतिक विविधता को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मधुर गायन से हुई। भोपाल की अनुभूति ट्रूप ने हिंदी और मलयालम गीतों का सुंदर संगम प्रस्तुत किया जिसने शास्त्रीय, फिल्मी और समकालीन धुनों को एक साथ जोड़कर अद्वितीय माहौल बनाया। यूएमए के अध्यक्ष ओडी जोसेफ ने दर्शकों के जोश और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि इस महोत्सव में हजारों लोग शामिल होकर केरल की कला और संस्कृति का आनंद ले रहे हैं। उन्होंने कलाकारों और स्वयंसेवकों को बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत बनाता है।
फ्यूजन म्यूजिक कॉन्सर्ट का दर्शकों ने उठाया लुफ्त
उत्सव में शाम का मुख्य आकर्षण फ्यूजन म्यूजिक कॉन्सर्ट रहा।केरल के प्रतिष्ठित कलाकारों ने हिंदी और मलयालम लोकधुनों को शास्त्रीय रागों तथा आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर ऐसा संगीतमय वातावरण बनाया, कि दर्शक तालियों से गूंज उठे। चेंडा, मृदंगम, बांसुरी के साथ गिटार और कीबोर्ड का मेल भारतीय और आधुनिक संगीत का सुंदर संवाद पेश करता दिखा।
इसके बाद कलामंडलम सुकरमण और उनके कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कथकली ने दर्शकों को रोमांचित किया। महाभारत और रामायण की कथाओं को भावपूर्ण चेहरे की अभिव्यक्ति, हस्त मुद्राओं और नाटकीय प्रस्तुति के माध्यम से शानदार ढंग से जीवंत किया गया।दर्शकों ने केरला फूड फेस्टिवल में साद्या, पारंपरिक स्नैक्स, ब्लैक ब्रीव कॉफी और मीठे व्यंजनों का स्वाद लिया। शिल्प और हैंडलूम स्टॉल्स में कोयर उत्पाद, आभूषण, आयुर्वेदिक वस्तुएँ और हस्तनिर्मित स्मृति चिन्ह आकर्षण का केंद्र बने रहे।
