एसके चौहान सलकनपुर। संभाग का केंद्र बिंदु नर्मदा क्षेत्र मरदानपुर नवाबों के शासन में जिला सीहोर और रायसेन की तहसीलों में से मुख्य तहसील हुआ करती थी. जो कि 50 से 60 गांव के किसानों अंतर्गत आने वाली तहसील लगभग 200 वर्ष पुराना इतिहास खुद में समेटे है.
यह तहसील नवाबी शासनकाल में भोपाल रियासत के नवाब मंसूर अली खान पटौदी के शासनकाल में मरदानपुर तहसील का प्रतिनिधित्व हमीदुल्लाह खान को दिया गया था. जिसके तहसीलदार मुर्तजा हुसैन एवं सिपाही बरकत अली थे. लगभग 40 से 50 कर्मचारियों का स्टाफ मरदानपुर तहसील में कार्यरत था जिसके पटवारी अनोखी लाल थे.
गांव के विशिष्ट ब्राह्मण परिवार के बुजुर्ग अशोक नायक ने बताया कि नवाबी शासनकाल में पटेली प्रथा चलती थी जहां हमारे दादाजी बैजनाथ पटेल नायक द्वारा मरदानपुर के लिए अनेक जनहितेषी कार्य किए हैं. नवाबी काल में तहसील का इतिहास लगभग 200 वर्षों पुराना बताया जाता है. देश आजाद होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा विलीनीकरण कर नवाबी शासन को समाप्त कर पंचायत राज शुरू किया गया. जिसमें 1955 में प्रथम बार पंडित राम गोपाल नायक सरपंच मनोनीत किए गए. जिनके द्वारा उक्त तहसील में प्राइमरी स्कूल एवं हॉस्पिटल का निर्माण किया गया था. जो आज भी मौजूद हैं आज भी बच्चे शिक्षा का लाभ ले रहे है.
स्थानीय जानकार प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि नवाबों के शासन काल के दौरान मरदानपुर की आधी से ज्यादा आबादी मुस्लिम थी। 1947 में देश आजाद होने के बाद केंद्रीय शासन ने गांव को नवाबी शासनकाल से मुक्त कराया था. आधी से ज्यादा आबादी 1953 में पाकिस्तान, अब्दुल्लागंज, गोहरगंज, भोपाल आदि जगह पायल पलायन हो गई. मरदानपुर एक स्वतंत्र ग्राम पंचायत के रूप में स्थापित हुआ. आज यहां मरदानपुर की आबादी 2500 है. जहां 1400 से अधिक वोटर मताधिकार का उपयोग करते हैं. जहां 400 हरिजन, 400 केवट कहार, 200 कुड़मी, 30 बासौड, 40 मुस्लिम, 40 दर्जी, 30 कलार, 50 ब्राह्मण, 60 नाई, 20 श्रीवास्तव, 20 सुनार, 10 लोहार, 10 मेहतर, 20 बिलाल 20 विभाला, 30 बंगाली, 10 तेली जाति के लोग निवासरत हंै. जिसकी जिला मुख्यालय से दूरी 120 किलोमीटर है.
