उज्जैन:सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों को लेकर संत समाज ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. शनिवार को पंचायती अखाड़ा निरंजनी में आयोजित स्थानीय अखाड़ा परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक में, संतों ने लैंड पूलिंग योजना को ऐच्छिक बताते हुए उसका समर्थन किया.नवभारत से चर्चा में अखड़ा परिषद के अध्यक्ष रामेश्वरम से बताया कि किसानों की आड़ में होने वाली राजनीति बंद होनी चाहिए, क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा मसला है. सभी साधु संतों ने एक स्वर में कहा कि सारे मतभेद बुलाकर उज्जैन का विकास करवाना चाहिए महाकुंभ के दौरान 12 साल में एक बार निर्माण कार्य होते हैं उसमें किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होना चाहिए.
साधु संतों ने कलेक्टर को भी किया आमंत्रित
संतों ने बड़नगर रोड पर निरंजनी अखाड़े में जो बैठक बुलाई उसमें अपनी बात मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव तक पहुंचाने के लिए कलेक्टर रोशन कुमार सिंह को भी आमंत्रित किया. श्री सिंह को संतों ने एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने आश्रमों के जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्यों के लिए मुख्यमंत्री से 50-50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की मांग की.
लैंड पूलिंग को संतों ने बताया ऐच्छिक
स्थानीय अखाड़ा परिषद की बैठक में लैंड पूलिंग योजना पर विस्तार से चर्चा हुई. संतों ने प्रशासन के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि लैंड पूलिंग पूरी तरह से ऐच्छिक है. संतों ने कहा कि प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किसानों की लिखित सहमति के बगैर कोई भी जमीन अधिग्रहित नहीं की जाएगी.
किसानों से संतों की अपील
संतों ने किसानों से अपील की कि वे किसी संगठन विशेष के बहकावे में न आएं और कुंभ मेले को दिव्य, अलौकिक व भव्य बनाने में प्रशासन का सहयोग करें. संतों ने सख्त लहजे में कहा कि किसानों की आड़ में जो लोग राजनीति कर रहे हैं वह इसे बंद करें एवं करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से न खेलें.
निर्माण कार्य जल्द हो
संतों का मत था कि मेला क्षेत्र में सड़क, ड्रेनेज और बिजली से संबंधित अधोसंरचनागत कार्य अभी से शुरू होने चाहिए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सिंहस्थ के दौरान अत्यधिक दबाव रहता है, संतों ने मांग की कि मेला क्षेत्र में स्थाई प्रकृति के निर्माण कार्य जल्द शुरू कराए जाएं, क्योंकि सिंहस्थ में अब बहुत कम समय बचा है.
संत समुदाय सरकार के साथ
संतों ने यह भी कहा कि पूरा साधु समाज शासन-प्रशासन के साथ है और सिंहस्थ 2028 को दिव्य और भव्य बनाने के लिए संकल्पित है. यदि निर्माण कार्य समय पर पूरे नहीं होते हैं, तो साधु-संतों के साथ-साथ 40 करोड़ आम श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा, जिनका इस महाकुंभ में आने का अनुमान है.
