युद्ध भूमि से राष्ट्र निर्माण तक 99 वर्ष की प्रेरणादायक यात्रा

युद्ध भूमि से राष्ट्र निर्माण तक 99 वर्ष की प्रेरणादायक यात्रा

नयी दिल्ली, 26 मार्च (वार्ता) पद्म श्री से सम्मानित हवलदार लालबिआकथांगा पचुआ (सेवानिवृत्त) की युद्धभूमि के साहसिक कारनामों से राष्ट्र-निर्माण की आवाज़ की 99 वर्ष की जीवन यात्रा अत्यन्त प्रेरणादायक रही है। स्पीयर कोर के अंतर्गत प्रादेशिक सेना और असम राइफल्स ने मिजोरम के आइज़ोल में पद्म श्री हवलदार लालबिआकथांगा पचुआ (सेवानिवृत्त) का हाल ही में 99वां जन्मदिन मनाया किसके साथ ही उन्होंने अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश किया।

असम रेजिमेंट की तीसरी बटालियन के एक विशिष्ट पूर्व सैनिक और द्वितीय विश्व युद्ध के अनुभवी हवलदार लालबिआकथांगा पचुआ की यात्रा उद्देश्य की दुर्लभ निरंतरता को दर्शाती है। सैन्य सेवा के बाद, उन्होंने स्वयं को पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक सेवा के लिए समर्पित किया, समाज और राष्ट्र-निर्माण में सार्थक योगदान दिया। उनका जीवन स्थायी प्रतिबद्धता, शांत नेतृत्व और वर्दी में सेवा से विचारों और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से सेवा तक सहज परिवर्तन का प्रमाण है।

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