सतना:मंदिर और राजमहलों से संगीत के स्वरों को आम लोगों के बीच पहुचाने का सफल प्रयास करने वाले बीसवीं सदी के दुनिया के बडे संगीतकारों में शुमार विन्ध्य की अमिट धरोहर बाबा अलाउद्दीन खान की 51वीं स्मृति संगीत संध्या में हुई खानापूर्ति का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मदीना भवन स्थित उनकी मजार पर वर्षों से होने वाली चादर पोशी की परम्परा को निभाने कोई अतिथि नहीं पहुंचा.
प्रदेश के संस्कृति विभाग और मैहर जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय संगीत समारोह के प्रथम दिन सिर्फ परम्परागत रस्में सिर्फ खानापूर्ति तक ही सीमित रही.राजधानी में बैठे आकाओं की सरपरस्ती में बनी समारोह की व्यवस्था में क्षेत्र के सुधी संगीत श्रोताओं को जिस अपनेपनकी कमी महसूस हुई उसकी चर्चा मंच तक पहुची.अतिथिओं ने भी अपने सम्बोधन में खुलकर जनता की भावनाओं के अनुरूप अपनी बात रखी.
हांलाकि इस बात का एहसास स्थानीय लोगों को उसी समय होने लगा जब संगीत साधकों के लिए मदीना कहे जाने वाले मदीना भवन में बाबा की मजार में चादरपोशी के कार्यक्रम में परम्परा के मुताबिक एक घण्टे का बिलम्ब हुआ.हालत यह थी के बाबा अलाउद्दीन खां के परिवार के सदस्य बाबा के नाती आशीष खान के सुपुत्र शिराज अली खां घर के अन्दर दस्तखान बिछाए अतिथियों के इस्तकबाल के लिए इन्तजार करते रहे पर समय पर कोई नहीं पहुंचा.
काफी जद्दोजहद के बीच तकरीबन पौन घण्टे के बाद चादरपोशी की परम्परा को निभाने के लिए मैहर अनुविभाग की अनुविभागीय अधिकारी दिव्या पटेल और नगर पुलिस अधीक्षक महेन्द्र सिंह और मुख्य नगर पालिका अधिकारी सुषमा मिश्रा को भेजा गया.हासिए में पहुच चुकी बाबा की स्मृतियों की इस प्रकार की खानापूर्ति को लेकर लोगों के बीच कानाफूसी उसी वक्त शुरू हो गई.किसी ने भी इस पर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया सार्वजनिक तौर पर जाहिर नहीं की.बाद में समारोह के लिए आमंत्रित बी और सी ग्रेड के कलाकारों से संगीत समारोह का आगाज हुआ.
आने का मूड नहीं था:राधा
मैहर जिले की प्रभारी मंत्री संगीत समारोह की मुख्यअतिथि राधा सिंह जिन्हे अधिकृत कार्यक्रम के अनुसार समारोह की अध्यक्षता करनी थी अपने सम्बोधन में खुलकर कहा कि उनका कार्यक्रम में आने का मूड नहीं था.स्थानीय विधायक के बुलावे पर वे यहां पहुची है.उन्होने कहा कि वे बाबा के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती है फिर भी उनकी जो पहचान है उसके मुताबिक कार्यक्रम का आयोजन होना चाहिए ताकि कार्यक्रम के दौरान खाली कुॢसयां भर सके.इसमें सरकार का बहुत सारा पैसा खर्च होता है और जनता जानकारी के अभाव में पहुच ही नहीं पाती.
आमंत्रण के कार्ड तो यहां छप सकते हैं:गणेश
समारोह की अध्यक्षता कर रहे सांसद गणेश सिंह ने अपने सम्बोधन समारोह के आयोजन में स्थानीय भागेदारी सुनिश्चित करने पर बल देते हुए आपत्तिजनक स्वर में कहा कि यह ठीक नहीं है कि इतने बडे कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र भी बाहर से छपकर आए.उन्होने समारोह के गिरते स्तर की चर्चा करते हुए संस्कृति विभाग के अधिकारियों से यह अपेक्षा की कि भविष्य में कार्यक्रम निर्धारण में स्थानीय लोगों की राय को भी शामिल किया जाए .अन्यथा यह कार्यक्रम भविष्य में अपनी गरिमा को खो देगा.
