
इंदौर। नवम अपर सत्र न्यायालय ने हत्या के दो मामलों और साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में आरोपी को दोहरा आजीवन कारावास व सश्रम कारावास से दंडित किया है. मामले की जांच के दौरान स्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र कर, गवाहों के बयानों व मोबाइल व लोकेशन फुटप्रिंट के आधार पर अभियोजन ने दोष सिद्ध किया.
न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह कुशवाह ने सत्र प्रकरण संख्या 256/2024 में मुकदमे का निर्णय सुनाया. अदालत ने आरोपी (पुलिन धामंदे) को दोहरा आजीवन कारावास, धारा 201 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास तथा 6,000 जुर्माना से दंडित किया. शासन की ओर से पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी सुरेन्द्र वास्केल ने की.
प्रकरण का संक्षेप यह है कि फरियादी पीयूष सोलंकी ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई कि संवाद नगर के फ्लैट नंबर 203 (ब्लॉक बी) में उसके ससुर कमलकिशोर धामंदे व साली रमा अरोरा का कोई हाल-चाल न मिलने पर जब वह वहां गया तो फ्लैट के पास बदबू आने पर ताला तोड़कर अंदर गया और दोनों के शव खून से लथपथ पड़े मिले. जबकि पुलिन धामंदे उस समय घर पर नहीं था. विचार-विवेचना में पुलिस ने मौके का नक्शा बनाया, वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए और साक्षियों के बयान दर्ज किए. आरोप है कि आरोपी मानसिक विकार (सिजोफ्रेनिया) से ग्रस्त रहा है और पूर्व में परिवार के साथ विवाद करता था. गिरफ्तार किए जाने पर आरोपी ने अपराध स्वीकार किया. समुचित जांच-पड़ताल व सबूतों के आधार पर अभियोग-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया और अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराया. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता और सबूतों की मजबूरी के चलते कड़ी सजा निर्धारित की गई है. फैसला सुनने के बाद अभियोजन और पीड़ित पक्ष ने अदालत की प्रक्रिया की पुष्टि की; जबकि रिहाई की संभावनाओं और अपील की जानकारी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे दी जाएगी.
