ब्यावरा। बेसहारा मवेशियों का जिले में बुरा हाल है. शासन, प्रशासन के लाख प्रयासों, दिशा निर्देशों के बाद भी बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित जगह नहीं मिल सकी है. बोवनी के बाद मवेशियों का हाईवे पर जमघट देखा जा सकता है. उलटे इनकी मुसीबत और बढ़ गई है. आये दिन सडक़ दुर्घटनाओं में मवेशियों की मौत रही है या फिर वह गंभीर घायल हो रहे है.
गौरतलब है कि मवेशियो को पूरी तरह से संरक्षण एवं उनकी देखभाल करने प्रशासन द्वारा उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखे जाने के सख्त निर्देश दिए गये थे.
कहा गया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग, अन्य मार्गो पर बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित करने के लिए सतत् देखरेख की जाये ताकि मवेशी सडक़ दुर्घटना का कारण न बने. बावजूद इसके आज भी हजारों की संख्या में मवेशी सडक़, चौराहो, हाईवे पर देखे जा सकतेे है.
हाईवे, चौराहो पर जमघट
बोवनी होने के बाद मवेशी फसलों की नुकसान न पहुंचा दे उन्हें खदेड़ा जा रहा है, जिसके बाद अब हाईवे, चौराहों, सडक़ो पर बड़ी संख्या में बेसहारा मवेशियों को देखा जा सकता है. आज जिले भर में हजारों की संख्या में बेसहारा गौवंश सडक़ो पर रहने को मजबूर है.
ठंड में परेशानी और बढ़ेगी
सडक़ दुर्घटनाओं, ठंड, गर्मी एवं बारिश में गौवंश की मौत होने के मामले सामने आते रहे है. अब ठंड का प्रकोप बढऩे से परेशानी और बढ़ेगी. खुले आसमान के नीचे रहने वाले मवेशियों के लिए ठंड से सुरक्षित बचना मुख्य समस्या होगी.
नाममात्र गौशालाऐ
जानकारी के अनुसार जिले भर में 140 गौशालाएं संचालित है, इनमें 111 शासकीय तथा 29 गौशालाएं अशासकीय है. प्रत्येक गौशाला में गौवंश के रहने की क्षमता 100 के आसपास है. इस तरह 14 हजार के आसपास ही गौवंश गौशालाओं में रह रहा है. जबकि जिले में बेसहारा गौवंश की संख्या पशु चिकित्सा विभाग के अनुसार हाल में हुई गणनानुसार एक लाख से अधिक पर जा पहुंची है.
