
झाबुआ। जिला मुख्यालय स्थित झाबुआ जनपद आजादी के बाद से ही कांग्रेस के कब्जे में रहीं है। पहली बार झाबुआ जनपद में भाजपा ने अपना कब्जा अध्यक्ष के रूप में जमाया है, तब से प्रशासन और शासन की ओर से उपेक्षा का शिकार बनती जा रहीं है, ऐसा जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधियों और सरपंचों का कहना है।
प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी के चलते झाबुआ जनपद के सभी विकास और निर्माण कार्य रुके पड़े है। जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ धरातल स्थल पर नहीं पहुंच पा रहा है। कारण बताया जाता है कि ना तो कलेक्टर, ना जिला पंचायत सीईओ, ना प्रभारी मंत्री और ना ही क्षेत्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। जिसके चलते जनपद पंचायत के सारे सरपंच और जनपद सदस्य हैरान और परेशान है। कलेक्टर नेहा मीना और जिला पंचायत सीईओ जितेन्द्रसिंह चौहान ने अपनी हठधर्मिता और तानाशाही दिखाते हुए झाबुआ जनपद के प्रभारी सीईओ के रूप में एक महिला नायब तहसीलदार को पदस्थ कर दिया है, जिसे जनपद के कार्य पद्धति और कार्य करने का तरीका ही नहीं आता है, ऐसे में झाबुआ जनपद के सारे काम और विकास की योजना तथा जनकल्याणकारी योजनाएं ठप्प पड़ी है। समय पर विभिन्न योजनाओं का भुगतान भी नहीं हो रहा है। प्रभारी सीईओ को कार्य का अनुभव नहीं होने से डरकर काम करती है या फिर बहाना बनाती है कि अभी देखेंगे ,बाद में करेंगे इस प्रकार के कथन के चलते सारे प्रतिनिधि आक्रोश से भरे पड़े है। प्रभारी सीईओ के खिलाफ किसी दिन भी यह आक्रोश सड़क पर उतर सकता है।
सभी का रवैया सुस्त बना हुआ है
इस मामले में जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि हरू भूरिया ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि ना तो प्रभारी मंत्री, ना ही कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और महिला एवं बाल विकास मंत्री इस समस्या के निदान के लिए कोई सक्रिय पहल नहीं कर रहे है, जिससे जनपद पंचायत से जुड़े सारे जनप्रतिनिधियों में आक्रोश व्याप्त है। जनपद झाबुआ की इस समस्या का समाधान कौन करेगा, यह जन चर्चा का विषय बना हुआ है। समस्या दिन-प्रतिदिन विकराल बनती जा रहीं है। इस ओर जल्द ही ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
