
नीमच। जिले में पिछले कुछ दिनों से हुई लगातार बारिश ने अफीम किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में आए अचानक बदलाव ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। जिन खेतों में अफीम की बुवाई पूरी हो चुकी थी, वहां अब बारिश का पानी भर गया है। इससे बीज सड़ गए हैं और किसान अब खेत दोबारा तैयार करने की सोच रहे हैं।
बीज सडऩे से नुकसान, फिर से करनी होगी बुवाई
इस साल पॉलिसी जल्दी आने से नारकोटिक्स विभाग ने अफीम लाइसेंस का काम समय से पहले पूरा कर लिया था। आमतौर पर यह प्रक्रिया नवंबर महीने में होती है, लेकिन इस बार अक्टूबर में ही किसानों को लाइसेंस मिलने से उन्होंने बुवाई शुरू कर दी थी। लेकिन अचानक हुई बे-मौसम बरसात ने पूरी योजना बिगाड़ दी। अब खेतों में पानी भरने और बीज सडऩे से किसानों को फिर से बुवाई करनी पड़ रही है।
किसान बदलवा रहे हैं खेतों के खसरा नंबर
बारिश से खेतों के खराब होने के बाद किसान अब नारकोटिक्स विभाग में खसरा नंबर बदलवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। जिनके पास दूसरा खेत है, वे नई जमीन में बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। वहीं जिनके पास अतिरिक्त खेत नहीं हैं, वे मोटर लगाकर खेतों से पानी निकालने में जुटे हैं ताकि दोबारा बुवाई हो सके।
अफीम मुखिया बोले – किसान 10 दिन पीछे चले गए
नीमच निवासी अफीम किसान राजेश मेघवाल ने बताया कि बारिश के कारण किसान करीब 10 दिन पीछे हो गए हैं। खेतों में पानी भर जाने के बाद उन्हें दोबारा खेत तैयार करने में 10 दिन लगेंगे। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग ने फिर से बारिश का अलर्ट दिया है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। अगर मौसम जल्द नहीं सुधरा तो बुवाई का समय निकल जाएगा और उत्पादन पर असर पड़ेगा।
दिसंबर में शुरू होगा नपती का काम
अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई, तो दिसंबर में अफीम के खेतों की नपती (जमीन नापने की प्रक्रिया) शुरू होगी। इससे खेती की प्रगति का आकलन किया जाता है। फिलहाल किसान आसमान साफ होने और खेत सूखने का इंतजार कर रहे हैं।
पुराने बीज से हो रही नई बुवाई की तैयारी
किसान बताते हैं कि वे पिछले साल की फसल से कुछ बीज संभालकर रखते हैं। इस बार बारिश से नुकसान के कारण उन्हें फिर से पुराने बीजों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। नीमच और चित्तौडग़ढ़ में बीज आसानी से मिल रहे हैं, जबकि खाद और दवाइयां मंदसौर व पिपलिया मंडी से खरीदी जा रही हैं। कई कृषि विशेषज्ञ भी खेतों का निरीक्षण कर किसानों को सलाह दे रहे हैं।
ठंड बढऩे की चेतावनी से बढ़ी चिंता
मौसम विभाग ने इस बार ठंड ज्यादा पडऩे की संभावना जताई है। ज्यादा ठंड में अफीम के पौधे कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे पैदावार पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसान अब मौसम के हर बदलाव पर नजर रखे हुए हैं।
साल भर की मेहनत अब मौसम के भरोसे
अफीम की खेती किसानों के लिए आमदनी का बड़ा जरिया है, लेकिन इस बार की बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेतों में पानी भर जाने से पूरी मेहनत व्यर्थ चली गई। अब किसान फिर से खेत तैयार कर रहे हैं, पर उन्हें डर है कि अगर दोबारा बारिश हुई तो सारा प्रयास फिर बेकार हो जाएगा।
अगर मौसम सुधरा तो फसल संभल सकती है
किसानों का कहना है कि अगर अब बारिश नहीं हुई और धूप बनी रही, तो दिसंबर तक खेत फिर से हरे नजर आने लगेंगे। मौसम सामान्य रहा तो अफीम की फसल धीरे-धीरे संभल जाएगी और किसान नुकसान की भरपाई करने में सफल हो सकेंगे।
