
जबलपुर। पेंशन प्राप्त जिला न्यायालय के सेवानिवृत्त जज की एसोसिएशन ने जिला व सत्र न्यायालय के अनुमोदन के बिना भत्ता राशि जारी नहीं करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए वित्त विभाग के सचिव को तलब किया है।
पूर्व न्यायाधीश कल्याण एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि साल 2005 के बाद जिला न्यायालय में नियुक्त न्यायाधीशों को पेंशन का लाभ नहीं मिलता है। इसके पूर्व के न्यायाधीशों को पेंशन के अलावा अलग-अलग भत्ते के तौर पर राशि प्रदान की जाती थी। साल 2005 के बाद सेवा में आये न्यायाधीशों ने सेवानिवृत्ति के बाद भत्ता राशि जो वर्तमान में 15 हजार रुपये है, उसे प्रदान करने राज्य सरकार के समक्ष अभ्यावेदन पेश किया था। राज्य सरकार ने अलग-अलग मद में मिलने वाले भत्ता राशि सेवानिवृत्त सभी जिला न्यायाधीशों को प्रदान करने के आदेश जारी किये थे। इसके साथ सरकार ने यह भी शर्तें निर्धारित कर दी कि राशि प्रदान करने के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश का अनुमोदन प्रतिवर्ष आवष्यक है।
याचिका में कहा गया था कि साल 2005 से पूर्व सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश की उम्र 80 साल से अधिक है। जिला व सत्र न्यायालय के अनुमोदन के लिए उन्हें प्रतिवर्ष उसे जिला में जाना होगा, जहां उनकी पदस्थापना है। इसके पूर्व उन्हें सिर्फ बैंक में अपने जीवित होने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होता था। सरकार के संशोधित नियमों के कारण उन्हें भत्ते के रूप में मिलने वाली राशि जारी नहीं की गयी है। सरकार का नया नियम वृद्ध अवस्था में उन्हें परेशान करने वाला है। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने सरकार से दिशा -निर्देश प्राप्त करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि राज्य सरकार के अधिकारियों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया है और वे पद छोड़ने के बाद अपने निवास स्थान पर जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की विशिष्ट प्रकृति को ध्यान में रखते युगलपीठ ने वित्त सचिव को तलब किया है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता हितेश शर्मा ने पैरवी की।
