
नई दिल्ली, 01 नवंबर : बिहार की पटना जिले की मनेर विधानसभा सीट, जो गंगा और सोन नदियों के पवित्र संगम पर स्थित है, पिछले एक दशक से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए एक मजबूत और अभेद्य किला बन चुकी है। पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सीट पूरी तरह से यादव समुदाय के वर्चस्व और कड़े राजनीतिक समीकरणों पर टिकी है। राजद के दिग्गज नेता भाई वीरेंद्र इस सीट से लगातार तीन बार (2010, 2015, 2020) जीत दर्ज कर चुके हैं और 2025 के विधानसभा चुनाव में जीत का चौका लगाने की तैयारी में हैं।
भाई वीरेंद्र ने 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के निखिल आनंद को 32,917 वोटों के बड़े अंतर से हराकर इस सीट पर अपनी पकड़ की मजबूती साबित की थी। मनेर में राजद का मजबूत राजनीतिक आधार सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी मनेर विधानसभा क्षेत्र ने राजद की मीसा भारती को 34,459 वोटों की बड़ी बढ़त दी थी, जो आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की मजबूत स्थिति का स्पष्ट संकेत है। राजद ने यादव वोट बैंक को सफलतापूर्वक साधकर यह गढ़ बनाया है।
मनेर की पहचान इसके प्रसिद्ध ‘मनेर के लड्डू’ की मिठास और गहरी सांस्कृतिक विरासत से है। कहा जाता है कि लड्डुओं का बेमिसाल स्वाद सोन नदी के मीठे पानी के कारण आता है और इनकी डिमांड विदेशों तक है। यह क्षेत्र 13वीं सदी के सूफी संत मखदूम याह्या मनेरी और 16वीं सदी के मखदूम शाह दौलत की दरगाहों के लिए भी प्रसिद्ध है, जो इसे इस्लामी शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनाता है। 2025 में एक बार फिर मनेर विधानसभा सीट राजद के गढ़ को बचाने की लड़ाई का गवाह बनेगी।
