इंदौर: कल भाजपा कार्यकारिणी घोषित होने बाद कालिख पोतने और पुतला जलाने के घटनाक्रम पर पार्टी में डैमेज कंट्रोल शुरू हो गया है. आज भोपाल से प्रदेश अध्यक्ष की सख्ती एक बाद मेलमिलाप का दौर शुरू हुआ और एक दूसरे से मिलकर मामले का पटाक्षेप हो गया.कल नगर कार्यकारिणी घोषित होने के बाद नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के खिलाफ खाती समाज मैदान में उतर गया था. समाज का आक्रोश नगर कार्यकारिणी में निलेश चौधरी और मनोज चौधरी को स्थान नहीं देने को लेकर था. विरोध खाती समाज का था तो अप्रत्यक्ष रुप से पूर्व विधायक और पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती का नाम स्वतः ही घटनाक्रम से जुड़ना लाजिमी हो गया.
बताया जा रहा है कि कल के घटनाक्रम को लेकर प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्थानीय नेतृत्व को सख्ती से कार्यकर्ताओं की बात सुनने और सम्मान करने की समझाइश दी. इसके बाद आज जीतू जिराती के समर्थक निलेश चौधरी नगर अध्यक्ष के घर पहुंचे और फिर दोनों कैलाश विजयवर्गीय, रमेश मेंदोला से मिलने के बाद दिनभर विभिन्न कार्यक्रमों में साथ घूमते देखे गए. चर्चा है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को हिदायत दी है. उसके बाद मिश्रा ने जीतू जिराती को फोन पर बात कर सहयोग और समर्थन की बात की है.
निलेश को पद नहीं देने से समाज ने किया विरोध, मैं शामिल नहींः जिराती
उक्त घटनाक्रम के मुख्य किरदार पिछले 11 साल से भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती ने कहा कि मैं पार्टी विरोधी गतिविधियों में कभी शामिल नहीं रहा. निलेश चौधरी को स्थान नहीं देने से समाज आक्रोशित था और समाज ने उग्रता दिखाई है. निलेश ने भी कोई सहयोग नहीं किया. मेरे पास मिश्रा का फोन आया और उन्होंने कहा कि आपका छोटा भाई हूं. मैंने कहा कि मेरा मामले से कोई लेना देना नहीं है. तुम सदा भाई रहोगे. निलेश भी सुमित से मिल लिया और आज दिनभर से दोनों साथ घूम रहे है. पार्टी के खिलाफ जाना मेरा स्वभाव कभी नहीं रहा है.
