
राजगढ़। जिला मुख्यालय राजगढ़ के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों बेसहारा गौवंश पर कुत्तो के हमले की घटनाएं बढ़ी है. आये दिन कुत्ते छोटे-छोटे बछड़ो पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे है, इन घायल बछड़ो के उपचार या फिर बेसहारा गौवंश के ईलाज के लिए पशु चिकित्सा विभाग की इमरजेंसी सेवा 1962 को कॉल कर बुलाया जाता है, विशेष बात यह है कि बेसहारा गौवंश के उपचार के लिए भी गौसेवको को एक निर्धारित शुल्क जमा करना पड़ रही है, तब कही जाकर बेसहारा गौवंश का उपचार हो पाता है.
उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा गौवंश, जानवरों को त्वरित उपचार सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य से इमरजेंसी सेवा के तौर पर 1962 डॉयल सुविधा का संचालन किया जा रहा है किंतु बेसहारा गौवंश का उपचार कराने के लिए भी यह राशि जमा कराना पड़ती है.
आपसी सहयोग कर कराते है उपचार जानकारी के अनुसार राजगढ़ के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों, हाईवे पर बड़ी संख्या में गौवंश की उपस्थिति है.
आर्थिक वहन उठाना पड़ रहा गौसेवकों को जानकारी के अनुसार राजगढ़ के आसपास ग्रामीण क्षेत्र एवं हाइवे पर गौवंश के बछड़ो पर कुत्ते हमला कर उन्हें घायल कर देते है. गौसेवकों द्वारा घायल गौवंश की देखरेख करते हुए इमरजेंसी सेवा 1962 को बुलाया जाता है तो 150 रुपये की रसीद कटती है तब कहीं जाकर गौवंश का उपचार हो पाता है. ऐसे में निःस्वार्थ भाव से सेवा में जुटे गौसेवको को अतिरिक्त आर्थिक वहन उठाना पड़ रहा है.
जिले में नहीं रेबिज इंजेक्शन कुत्ते के द्वारा किसी मवेशी को काट लेने पर पीडित मवेशी को रेबिज इंजेक्शन लगता है, किंतु जिला पशु चिकित्सा विभाग के पास इन दिनों रेबिज इंजेक्शन नहीं है. ऐसे में प्रायवेट तौर पर यह इंजेक्शन खरीदकर लगवाया जाता है, जिसमें एक बड़ी राशि खर्च होती है. ऐसी स्थिति में बेसहारा गौवंश को यदि कोई कुत्ता काट लेता है तो उसके लिए गौसेवकों को प्रायवेट तौर पर रेबिज इंजेक्शन खरीदकर लाना पड़ रहा है.
पशु चिकित्सा विभाग की इमरजेंसी सेवा 1962 की उपचार सेवा के लिए एक तय निर्धारित शुल्क राशि की रसीद कटती है, बेसहारा गौवंश का उपचार निःशुल्क करने हेतु कोई प्रावधान फिलहाल नहीं है, जिले में रेबिज इंजेक्शन अभी आगे से ही नहीं आ रहे
है.
डा. प्रवीण दीक्षित
जिला अधिकारी
