मज़बूत माँग के साथ अर्थव्यवस्था में तेज़ी जारी: वित्त मंत्रालय

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (वार्ता) वित्त मंत्रालय की सोमवार को जारी एक मासिक रिपोर्ट में कहा गया है कि वस्तु एवं सेवा कर ( जीएसटी ) सुधारों के कार्यान्वयन और त्योहारी सीज़न के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में माँग की स्थिति मज़बूत होने से देश की आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी बनी हुई है।
सितंबर, 2025 के लिए इस रिपोर्ट में कहा गया है, “मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और खाद्य श्रेणियों में अपस्फीति से इसमें मदद मिली है। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति घट कर 1.7 प्रतिशत तक आई है। गैर-खाद्य और गैर-ईंधन वस्तुओं की कीमतें स्थिरता के साथ सितंबर 2025 में मुख्य मुद्रास्फीति (विनिर्मित उत्पाद के वर्ग की) अनुमानित 4.6 प्रतिशत रही।”
वित्त मंत्रालय ने कहा कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्र ने आपूर्ति पक्ष में अच्छा विस्तार किया है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अनुमान से ज़्यादा वृद्धि और दूसरी तिमाही में लगातार वृद्धि के रुझानों को देखते हुए, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चालू वित्त वर्ष के वृद्धि के अनुमान को सुधार किया है और इसके 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
रिपोर्ट में देश के वैश्विक व्यापार के संबंध में कहा गया है, ” अनिश्चितताओं से भरे वैश्विक व्यापार परिदृश्य के बीच, भारत की बाह्य आर्थिक गतिविधियाँ वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में मजबूत बनी हुई हैं। देश के कुल निर्यात में (वस्तुओं और सेवाओं को मिला कर ) चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में सालाना आधार पर 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 413.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।”
इस दौरान वाणिज्यिक वस्तुओं के निर्यात में जहाँ तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं सेवा निर्यात में 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। इसी अवधि के दौरान, मुख्य वाणिज्यिक वस्तुओं (पेट्रोलियम और रत्न आभूषणों को छोड़ कर) के निर्यात में एक साल पहले की इसी अवधि से 7.5 प्रतिशत की वृद्धि जारी रही।
केंद्रीय बैंक द्वारा हाल ही में किए गए नीतिगत बदलावों की सराहना करते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनाए रखने के आरबीआई के प्रयासों ने आर्थिक गतिविधियों को और मज़बूत करने के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आरबीआई की हालिया नियामकीय और विकास नीति, व्यापक संरचनात्मक सुधारों के साथ विवेकपूर्ण व्यवहार को दर्शाते हुए, उभरती हुई व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के प्रति एक संतुलित प्रतिक्रिया को दर्शाती है।
कौशल विकास और रोज़गार सृजन पर सरकार के ज़ोर के कारण वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में श्रम बाज़ार मजबूत बना रहा है। इस दौरान श्रम बल की भागीदारी में वृद्धि, उद्योग और सेवा क्षेत्र दोनों में रोज़गार केअवसरों में विस्तार और अर्थव्यवस्था में राजगार को लेकर भावना मज़बूत रही ।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी 2.0 से सभी क्षेत्रों में उपभोग और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे अर्थव्यवस्था में रोज़गार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के उद्देश्य से अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भी पहल कर रही है।

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