चेन्नई में गैस संकट का हाहाकार, ईंधन की कमी से मेडिकल कॉलेज ने हॉस्टल खाली करने का दिया आदेश, ऑनलाइन मोड में होगी पढ़ाई, होटलों के मेनू से गायब हुए पकवान

चेन्नई | तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में कमर्शियल गैस की भारी किल्लत ने अब छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है। शहर के एक प्रतिष्ठित निजी मेडिकल कॉलेज ने गैस की कमी के कारण हॉस्टल मेस में खाना बनाने में असमर्थता जताई है। कॉलेज प्रशासन ने 12 मार्च से 25 मार्च तक नियमित कक्षाएं निलंबित करते हुए छात्रों को हॉस्टल खाली कर घर जाने का निर्देश दिया है। इस दौरान मेडिकल की पढ़ाई ऑनलाइन मोड में संचालित की जाएगी। हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के सामने अचानक आए इस आदेश से अफरा-तफरी का माहौल है, क्योंकि बिना भोजन के छात्रावास में रहना नामुमकिन हो गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, गैस की इस अभूतपूर्व किल्लत का सीधा संबंध पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और संघर्ष से है। भारत अपनी एलपीजी (LPG) जरूरतों के लिए कुवैत, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों पर निर्भर है, जहाँ से आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण आयात में भारी गिरावट आई है। केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस आपूर्ति सुरक्षित रखने को प्राथमिकता दी है, जिसके चलते कमर्शियल सिलेंडरों का उत्पादन या तो बंद कर दिया गया है या बेहद सीमित है। इसका सबसे बुरा असर चेन्नई के होटल और कैटरिंग उद्योग पर पड़ा है, जहाँ कारोबार ठप होने की कगार पर पहुँच गया है।

ईंधन बचाने के लिए शहर के रेस्तरां और भोजनालयों ने अपने मेनू में भारी कटौती कर दी है। लंच की थाली से सांभर, रसम और पोरियल जैसे कई व्यंजन गायब हो गए हैं और अब केवल लेमन राइस या टमाटर चावल जैसे सरल पकवान ही परोसे जा रहे हैं। नुंगमबक्कम और एगमोर जैसे इलाकों में चाय की दुकानों ने स्नैक्स बनाना बंद कर दिया है। विकल्प के तौर पर लकड़ी और चारकोल की मांग बढ़ने से उनकी कीमतों में 1,000 रुपये प्रति टन तक का उछाल आया है। यदि आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई, तो शहर के हजारों छोटे और मध्यम दर्जे के होटल स्थायी रूप से बंद हो सकते हैं।

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